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माहेश्वरी समाज के भूतड़ा की अध्यक्षता वाली संस्था में नीतिगत फैसलों पर रोक

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माहेश्वरी समाज के भूतड़ा की अध्यक्षता वाली संस्था में नीतिगत फैसलों पर रोक


अजमेर, 09 मई (हि.स.)। अजमेर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रांत गुप्ता ने अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के विवाद में दोनों पक्षों पर यथास्थिति के आदेश दिए है। आदेश के अनुसार अब रामकुमार भूतड़ा की अध्यक्षता वाली प्रबंध कार्य समिति कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकती है। अदालत के इस आदेश से अयोध्या में निर्माणाधीन माहेश्वरी समाज की धर्मशाला के उद्घाटन समारोह पर भी तलवार लटक गई है।

न्यायाधीश विक्रांत गुप्ता ने यथास्थिति का आदेश देने से पहले दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास भी किया था। न्यायाधीश गुप्ता चाहते थे कि समाज से जुड़े विवाद को समाज के प्रतिनिधि आपस में बैठकर सुलझा लें, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। संस्था के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य राधा मोहन सोनी, हेमराज भराडिय़ा, सोहनलाल भूतड़ा, रामकुमार मांधना और संस्था के सदस्य राहुल सोमानी, पकंज सोमानी की ओर से पैरवी करते हुए विवेक पाराशर, हर्षित मित्तल और गौरव जैन ने कहा कि संस्था के संविधान के अनुसार चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद किसी भी स्थिति में कार्यकाल को नहीं बढ़ाया जा सकता है, लेकिन फिर भी रामकुमार भूतड़ा ने अपनी कार्यकारिणी का कार्यकाल दिसंबर 2025 में एक वर्ष के लिए बढ़ाने का निर्णय ले लिया। जब संस्था के संविधान में कार्यकाल बढ़ाने का प्रावधान नहीं है तो फिर भूतड़ा कैसे अध्यक्ष पद पर बने रह सकते हैं? वकीलों ने अदालत को बताया कि संविधान के अनुसार मार्गदर्शक मंडल ने किशन गोपाल दरगड़ को चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी भी घोषित कर दिया, लेकिन भूतड़ा चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं होने दे रहे हैं। इसके उलट भूतड़ा ने चुनाव की तिथि घोषित किए बगैर ही लक्ष्मीनारायण बल्दवा को अपनी ओर से चुनाव अधिकारी घोषित कर दिया। जबकि मार्गदर्शक मंडल द्वारा चुनाव अधिकारी घोषित किए जाने के बाद भूतड़ा को दूसरा चुनाव अधिकारी नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। अदालत को यह भी बताया गया कि भूतड़ा की प्रबंध समिति के अधिकांश सदस्यों ने चुनाव करवाने की मांग को लेकर इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में भूतड़ा को अध्यक्ष पद पर रहने का कोई वैधानिक और नैतिक अधिकार नहीं है। वही भूतड़ा के पक्ष के वकीलों का कहना रहा कि साधारण सभा ने भूतड़ा के कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि की है। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद ही न्यायाधीश गुप्ता ने यथास्थिति के आदेश दिए। अब इस मामले में 19 मई को सुनवाई होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष