अजमेर में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता
अजमेर, 29 सितंबर (हि.स.)। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के आह्वान पर मंगलवार को अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी और देहात जिला कांग्रेस कमेटी ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यालय ज्योतिबा फुले सर्किल से जिलाधीश कार्यालय तक रैली निकाली गई। कार्यकर्ताओं ने रास्तेभर नारेबाजी की और कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध सभा की। प्रदर्शन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला भी ले जाया गया, जिसे बाद में कार्यकर्ताओं ने फूंका।
प्रदर्शन का नेतृत्व शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. राजकुमार जयपाल तथा देहात कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक विकास चौधरी ने किया। रैली में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बैनर, पोस्टर और तख्तियां लेकर शामिल हुए। विरोध सभा को पूर्व मंत्री डॉ. रघु शर्मा, डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी, डॉ. गोपाल बाहेती, महेंद्र सिंह रलावता, द्रोपदी कोली, महेंद्र गुर्जर, शिवप्रकाश गुर्जर, राजेश टंडन, संगठन महासचिव महेंद्र चौधरी और विवेक पाराशर सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया।
कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए और नारेबाजी की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, जिसके चलते कुछ देर तक मौके पर गहमागहमी की स्थिति रही। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया।
पुतला दहन के बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को बसों में बैठाया। कांग्रेस के अनुसार कई पार्षदों, जिला कांग्रेस कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी। नसीम अख्तर, फखरे मोईन, विवेक पाराशर, शैलेश गुप्ता और ईश्वर टहल्याणी सहित कई पदाधिकारी गिरफ्तारी देने वालों में शामिल रहे। पुलिस प्रदर्शनकारियों को बसों से आईजी कार्यालय के सामने ले गई, जहां बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल और देहात कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक विकास चौधरी ने कहा कि कांग्रेस का प्रदर्शन चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को लेकर है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित सवालों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस समेत विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने एसआईआर से जुड़े निर्णयों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही थी। आयोग ने यह भी कहा था कि 24 जून 2025 का एसआईआर आदेश पूरी तरह आयोग की मंजूरी से जारी हुआ था।
कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद भाजपा शहर अध्यक्ष रमेश सोनी और जयपुर महापौर अनामिका शर्मा ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर पलटवार किया। सोनी और शर्मा ने कांग्रेस नेताओं से चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगाए गए आरोपों पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
रमेश सोनी ने कहा कि 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान से एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। उन्होंने कहा कि आयोग ने एसआईआर से जुड़े प्रमुख निर्णयों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है और 24 जून 2025 का एसआईआर आदेश भी पूरे आयोग की मंजूरी से जारी हुआ था।
अनामिका शर्मा ने कहा कि आयोग के अनुसार एसआईआर आदेश को 27 मई 2026 को उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिस पत्र को एसआईआर और चुनाव आयोग की नीतियों से जोड़कर सवाल उठा रही थी, आयोग ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीतिगत व्यवस्था या आईटी डिवीजन से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर के अपने स्पष्टीकरण में भी कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र को आयोग की नीति या आईटी डिवीजन से संबंधित नहीं बताया था।
रमेश सोनी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक मुद्दों के लिए चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद कांग्रेस को अपने आरोपों की समीक्षा करनी चाहिए और तथ्यों का सम्मान करना चाहिए। अनामिका शर्मा ने कांग्रेस के पूर्व में ईवीएम, चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों को सामने रखना जरूरी है।
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर के बयान में यह भी कहा था कि एसआईआर से जुड़े आदेश और बाद में जारी कार्यक्रम आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुए थे। साथ ही आयोग ने एसआईआर से जुड़े कुछ मामलों में मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने और ईसीआईनेट प्रणाली की समीक्षा के लिए समिति गठित करने की जानकारी दी थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

