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एग्रीस्टैक स्टीयरिंग कमेटी की बैठक: कृषि सेवाओं को डिजिटल और किसान-केंद्रित बनाने पर जोर

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एग्रीस्टैक स्टीयरिंग कमेटी की बैठक: कृषि सेवाओं को डिजिटल और किसान-केंद्रित बनाने पर जोर


जयपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में सोमवार को एग्रीस्टैक स्टीयरिंग कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में एग्रीस्टैक के तहत फॉर्मर रजिस्ट्री, फॉर्मर आईडी, डिजिटल क्रॉप सर्वे, डेटा सिंक्रोनाइजेशन, एग्रीस्टैक आधारित उर्वरक वितरण, एमएसपी पर खरीद तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि एग्रीस्टैक का उद्देश्य केवल डिजिटल डाटाबेस तैयार करना नहीं, बल्कि किसानों को उनकी भूमि, फसल एवं कृषि सेवाओं से जुड़ी सभी सुविधाएं एकीकृत और सरल रूप में उपलब्ध कराना है। उन्होंने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करते हुए एग्रीस्टैक के निर्धारित माइलस्टोन समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक 87 लाख 44 हजार 842 किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 96.95 प्रतिशत है। एग्रीस्टैक से संबंधित कार्यों के पूर्ण होने पर राज्य को अब तक 737 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत हुई है।

मुख्य सचिव ने फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति की समीक्षा करते हुए शेष किसानों के पंजीकरण को अभियान के रूप में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कम प्रगति वाले जिलों में विशेष फील्ड विजिट, संभागवार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, प्रशिक्षण तथा कृषि पर्यवेक्षकों की सक्रिय भागीदारी करने को कहा।

उन्होंने कहा कि फॉर्मर रजिस्ट्री को शत-प्रतिशत पूर्ण करने के साथ-साथ इसे निरंतर अपडेट रखना भी आवश्यक है। इसके लिए मोबाइल ऐप का व्यापक उपयोग किया जाए तथा एसएमएस, समाचार पत्रों, ग्राम पंचायतों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किसानों को प्रेरित किया जाए।

मुख्य सचिव ने बजट घोषणा के अनुरूप कृषि विभाग में एग्रीस्टैक कमिश्नरेट की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही स्वतंत्र पद सृजन से संबंधित कार्यवाही को भी शीघ्र पूरा करने को कहा।

उन्होंने बताया कि फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल को शीघ्र ही पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। प्रमुख शासन सचिव कृषि मंजू राजपाल ने बताया कि राजसमंद और सिरोही में यह फ्रेमवर्क पहले ही लागू किया जा चुका है, जहां 65 हजार से अधिक किसानों द्वारा 10 हजार मैट्रिक टन से अधिक उर्वरक क्रय किया गया है।

इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि सफल मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू कर उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और किसान हितैषी बनाया जाए।

मुख्य सचिव ने डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा करते हुए आगामी खरीफ सीजन में इसे अधिक सटीक और सहभागी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि लक्षित 2.36 करोड़ खसरों में से 1.89 करोड़ खसरों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जो 80.21 प्रतिशत है।

उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी खरीफ में सभी 424 ऑनलाइन तहसीलों और 50,478 ऑनलाइन गांवों में सर्वे सुनिश्चित किया जाए। साथ ही 20 मीटर भू-सीमा निर्धारण और भू-चिह्नित फसल फोटो के माध्यम से प्रमाणिक डेटा संकलन किया जाए।

मुख्य सचिव ने किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ाते हुए कम से कम 25 प्रतिशत (लगभग 71 लाख खसरों) की स्वयं गिरदावरी का लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री को सभी किसान-केंद्रित योजनाओं से जोड़ा जाए। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य योजनाओं के शेष लाभार्थियों को कृषक पहचान संख्या से जोड़ने की प्रक्रिया तेज की जाए।

उन्होंने नामांतरण के समय आधार संख्या और कृषक पहचान संख्या दर्ज करने की व्यवस्था शीघ्र लागू करने तथा राजस्व अभिलेखों के साथ स्वचालित समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि एग्रीस्टैक के माध्यम से कृषि सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और किसान-केंद्रित बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से उर्वरक वितरण, एमएसपी पर खरीद और अन्य सेवाओं में डेटा आधारित निर्णय संभव होंगे, जिससे किसानों को समय पर और लक्षित लाभ मिलेगा। उन्होंने कृषि विभाग, राजस्व मंडल, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग, एनआईसी, सहकारिता विभाग, राजफेड तथा जिला प्रशासन के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।

बैठक में वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया, राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकांत, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल, सहकारिता विभाग के सचिव समित शर्मा तथा सेवानिवृत्त आईएएस राजीव चावला (चीफ नॉलेज ऑफिसर, एग्रीस्टैक नई दिल्ली) ने ऑनलाइन भाग लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित