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समाज में सकारात्मक विमर्श स्थापित करने वाले योद्धा बनें कार्यकर्ता — निम्बाराम

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समाज में सकारात्मक विमर्श स्थापित करने वाले योद्धा बनें कार्यकर्ता — निम्बाराम


समाज में सकारात्मक विमर्श स्थापित करने वाले योद्धा बनें कार्यकर्ता — निम्बाराम


उदयपुर, 01 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम ने कहा कि वर्तमान समय केवल परिस्थितियों का नहीं, बल्कि विचारों का भी युद्धकाल है। ऐसे समय में प्रत्येक कार्यकर्ता को समाज में सकारात्मक विमर्श स्थापित करने वाले योद्धा के रूप में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान राष्ट्र सशक्तीकरण के उद्देश्य से निर्धारित 'पंच परिवर्तन' के संकल्प को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रत्येक कार्यकर्ता का दायित्व है।

वे यहां प्रताप गौरव केन्द्र 'राष्ट्रीय तीर्थ' के कुंभा सभागार में हल्दीघाटी सार्द्ध चतु:शती समारोह पश्चात श्रम परिहार कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ ने अपने शताब्दी वर्ष एवं अमृत काल के परिप्रेक्ष्य में स्व-बोध, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, नागरिक शिष्टाचार (कर्तव्यबोध) तथा कुटुम्ब प्रबोधन जैसे पांच प्रमुख परिवर्तन बिंदुओं को समाज जीवन का आधार बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन विषयों पर व्यापक जनजागरण और सतत सामाजिक सहभागिता ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी।

निंबाराम ने कहा कि हल्दीघाटी युद्ध विजय सार्द्ध चतु:शती समारोह का सफल आयोजन किसी उपलब्धि का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के एक दीर्घकालीन अभियान का प्रारंभ है। इस समारोह की सार्थकता तभी है जब समाज की समस्त सज्जन शक्तियों को साथ लेकर निरंतर जन-विमर्श को आगे बढ़ाया जाए।

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता को कमजोर करने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रकार के वैचारिक अभियान चलाए जाते रहे हैं। ऐसे प्रयास समाज को विभाजित करने और सांस्कृतिक मूल्यों को कमजोर करने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रहित के विषयों पर समाज को जागरूक, संगठित एवं सक्रिय बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आज का संघर्ष वैचारिक है और ऐसे समय में हल्दीघाटी युद्ध विजय सार्ध चतु:शती समारोह का सफल आयोजन एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटना के रूप में स्थापित हुआ है। इसकी ओर देश ही नहीं, विश्व समाज की भी दृष्टि रही है। अब आवश्यकता इस बात की है कि समारोह के मूल संदेशों को छोटे-छोटे, प्रभावी और जनसुलभ माध्यमों से समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जाए, ताकि यह विमर्श वर्षभर सतत गतिशील बना रहे।

उन्होंने सुझाव दिया कि आगामी वर्षभर प्रताप गौरव केंद्र आने वाले प्रत्येक दर्शनार्थी को हल्दीघाटी की पवित्र मिट्टी का स्मृति-पैकेट भेंट किया जाए, ताकि वे उसे अपने पूजास्थल पर स्थापित कर महाराणा प्रताप के त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा का स्मरण कर सकें तथा यह प्रेरणा भावी पीढ़ियों तक पहुंचती रहे।

उन्होंने आह्वान किया कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अंतर्गत गांव—गांव में उपसमितियों का गठन कर महाराणा प्रताप के जीवन, उनके आदर्शों तथा हल्दीघाटी युद्ध विजय के ऐतिहासिक महत्व पर निरंतर संवाद किया जाए। यही प्रयास इस राष्ट्रीय अभियान को स्थायित्व प्रदान करेगा तथा समाज में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना को नई ऊर्जा देगा।

इससे पूर्व, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, महामंत्री दीपक कुमार शुक्ल, समारोह संयोजक सीए महावीर चपलोत ने भी विचार रखे। प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने पूरे आयोजन की प्रबंध व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के अनुशासित प्रबंधन को न केवल अतिथियों, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों तक ने रेखांकित किया। कई कार्यकर्ताओं ने भी समारोह को लेकर अनुभव सुनाए। कार्यक्रम में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री स्व. विजय सिंह बाघेला को 2 मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता