home page

तीन धाराएं, एक संगम... कदमताल से गूंजा डूंगरपुर

 | 
तीन धाराएं, एक संगम... कदमताल से गूंजा डूंगरपुर


तीन धाराएं, एक संगम... कदमताल से गूंजा डूंगरपुर


तीन धाराएं, एक संगम... कदमताल से गूंजा डूंगरपुर


डूंगरपुर, 25 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को डूंगरपुर शहर में आयोजित अभ्युदय त्रिवेणी संगम पथ संचलन में अनुशासन, संगठन और एकजुटता का भव्य नजारा देखने को मिला। सफेद शर्ट, खाकी पेंट और सिर पर काली टोपी पहने हाथों में दंड लेकर निकले स्वयंसेवकों की कदमताल और घोष दल की धुनों ने शहरवासियों का ध्यान आकर्षित किया। शहर के तीन अलग-अलग मार्गों से निकले पथ संचलन का तहसील चौराहे पर संगम हुआ तो भारत माता के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

संघ के 101 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस त्रिवेणी पथ संचलन में पहली बार तीन अलग-अलग धाराओं को एक साथ मिलाकर शहर के प्रमुख मार्गों से संचलन निकाला गया। दोपहर 3 बजे शुरू हुए संचलन में स्वयंसेवक अपने-अपने निर्धारित मार्गों से आगे बढ़ते हुए तहसील चौराहे पहुंचे। यहां तीनों धाराओं के एक साथ मिलने का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा। बड़ी संख्या में लोग इस अनूठे संगम को देखने के लिए जुटे रहे।

अभ्युदय त्रिवेणी संगम पथ संचलन के तहत स्वयंसेवकों के तीन समूह अलग-अलग स्थानों से रवाना हुए। पहली धारा शास्त्री कॉलोनी स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर, दूसरी धारा नवाडेरा क्षेत्र के नया महादेव मंदिर तथा तीसरी धारा कुबेर कुंदन विहार क्षेत्र से निकली। तीनों धाराएं निर्धारित मार्गों से होते हुए तहसील चौराहे पर पहुंचीं, जहां उनका सामूहिक संगम हुआ। तीनों धाराओं के एक साथ मिलने के बाद स्वयंसेवक संयुक्त रूप से आगे बढ़े। घोष की धुन पर एक लय में कदमताल करते स्वयंसेवकों की कतारों ने आयोजन को विशिष्ट स्वरूप दिया। संगम स्थल पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और भारत माता के जयकारे लगाए।

तहसील चौराहे से संयुक्त पथ संचलन गेपसागर की पाल से होते हुए पुराने अस्पताल, माणक चौक, घाटी जैन मंदिर, हड़मतपोल, वखारिया चौक, कानेरा पोल और मोची बाजार सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा। इसके बाद संचलन नगर परिषद क्षेत्र से होते हुए लक्ष्मण मैदान पहुंचा। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने स्वयंसेवकों का स्वागत किया। पूरे मार्ग में स्वयंसेवकों की एक जैसी गणवेश, अनुशासित कदमताल और घोष दल की प्रस्तुति लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। शहर के प्रमुख मार्गों पर पथ संचलन को देखने के लिए लोगों की मौजूदगी रही।

लक्ष्मण मैदान में पथ संचलन के समापन पर विजयादशमी उत्सव के तहत शस्त्र पूजन और बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। वक्ताओं ने देशभक्ति, अनुशासन, संगठन और सामाजिक एकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों के साथ शहरवासी भी शामिल हुए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष