ईमानदारी और पारदर्शिता ही सुशासन की पहचान: मुख्यमंत्री
जयपुर, 30 मई (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प को साकार करने में कार्मिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ईमानदारी, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना से किया गया कार्य ही सुशासन की वास्तविक पहचान बनता है। उन्होंने कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे भ्रष्ट आचरण के दलदल से दूर रहकर जनसेवा को अपना सर्वोच्च ध्येय बनाएं और जनता को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री शनिवार को जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में आयोजित राजस्थान नगर पालिका कर्मचारी फेडरेशन के नवम महाधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कर्मचारी कल्याण स्मारिका का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “न खाऊंगा और न खाने दूंगा” के मूलमंत्र को आधार बनाकर प्रदेश में कठोर कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक 103 अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि 6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। साथ ही 11 भ्रष्ट अधिकारियों की आजीवन पेंशन पर रोक लगाई गई है। इसके अतिरिक्त रिश्वत, ट्रैप, पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति दी गई है। वहीं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 अन्य मामलों में भी सख्त कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी शहर की पहचान उसकी स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं से होती है। प्रदेश के शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने में नगर पालिका कर्मचारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में जयपुर ग्रेटर नगर निगम ने पूरे देश में 16वां स्थान हासिल किया है, जबकि 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में उदयपुर 13वें स्थान पर रहा। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य राजस्थान के शहरों को देश में स्वच्छता के मामले में अग्रणी बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इस अभियान ने लोगों की स्वच्छता संबंधी आदतों में सकारात्मक बदलाव लाया है।
उन्होंने कहा कि घर-घर शौचालय निर्माण से महिलाओं को गरिमा मिली है। साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के जरिए शहरों में आधारभूत ढांचे और नागरिक सुविधाओं का व्यापक विकास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित शहरों के निर्माण की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अमृत 2.0 योजना के तहत प्रदेश के 200 शहरों और कस्बों में 11 हजार 560 करोड़ रुपये की लागत से 363 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इन परियोजनाओं में पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज और डिजिटल नगर सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नई टाउनशिप नीति-2024 लागू की है, जिसका उद्देश्य शहरों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और आधुनिक सफाई व्यवस्था को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से देशभर में जल संचय-जनभागीदारी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में राजस्थान में “वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान” संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि “हरियालो राजस्थान” अभियान के तहत अब तक प्रदेश में लगभग 20 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं और इस वर्ष 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके तहत प्रदेश में पहली बार चंदन वन भी विकसित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन का सबसे पहला संपर्क नगर निकाय कर्मचारियों से होता है। सफाई, पेयजल, सड़क, सीवर, पार्कों के रखरखाव, अग्निशमन और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी मूलभूत सेवाओं के जरिए ये कर्मचारी जनता का जीवन आसान और सुरक्षित बनाते हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में नगर निकायों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने जा रही है। ऐसे में कर्मचारियों को सेवा और समर्पण की भावना से कार्य करते हुए प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए पानी और बिजली क्षेत्र में विभिन्न परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि “राइजिंग राजस्थान” अभियान के तहत लगभग 9 लाख करोड़ रुपये के एमओयू धरातल पर उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने एसआईटी और एजीटीएफ का गठन कर पेपरलीक जैसी समस्याओं पर प्रभावी लगाम लगाई है और युवाओं को लगातार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि राजस्थान को मुख्यमंत्री के रूप में किसान पुत्र का नेतृत्व मिला है, जिन्होंने किसानों और प्रदेश के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के साथ राज्य सरकार ने भी किसानों की सहायता राशि बढ़ाई है। साथ ही सरकार “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” और “हरियालो राजस्थान” जैसे अभियानों के जरिए जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही है।
नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन, जनकल्याण और प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन, ऊर्जा, कर्मचारी कल्याण, युवाओं के हित और आधारभूत संरचना के विकास के क्षेत्र में सरकार की योजनाएं प्रदेश को “विकसित राजस्थान-2047” के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ा रही हैं।
इस अवसर पर स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन, राजस्थान नगर पालिका कर्मचारी फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष भागचंद श्रीमाल सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

