निगम का मानसून प्लान, 2.3 लाख पौधों से हरा भरा होगा जयपुर
जयपुर, 04 मई (हि.स.)। नगर निगम ने गुलाबी नगर को लेकर मानसून का प्लान तैयार कर लिया है। शहर को हरा भरा करने के लिए निगम जयपुर में 2.36 लाख पौधे लगाएगा। इसके लिए नगर निगम ने मानसून से पूर्व ही टेंडर सहित अन्य प्रक्रियाएं शुरू कर दी है। प्रदेश में मानसून की दस्तक जून माह के अंतिम सप्ताह में होती है। 2025 में प्रदेश में मानसून ने 18 जून को दस्तक दी थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मानसून के दौरान नगर निगम ने हरियालो राजस्थान के तहत 2.36 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रत्येक जोन के उपायुक्त, अधिशासी अभियंता, उपायुक्त पशु प्रबंधन को जगह चिन्हित करने और पौधे लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। पौधारोपण के लिए नगर निगम वन विभाग ने पौधों की खरीद करेगा। नगर निगम शहर के प्रमुख चौराहों, डिवाइडर, स्कूल, कॉलेजों में भी पौधारोपण करवाएगा।
वर्तमान में जयपुर की आबादी करीब 50 से 60 लाख के बीच है। जयपुर शहर में कुल ग्रीन स्पेस करीब 31 प्रतिशत है। शहर में पौधों का आच्छादन लगभग 12 प्रतिशत है। राजस्थान सरकार ने मिशन हरियालो के तहत प्रदेशभर में 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राज्य सरकार ने वन विभाग को पौधारोपण के लिए पौधे तैयार करने के निर्देश दिए है। इसके लिए वन विभाग ने युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है।
निगम के उद्यानविज्ञ रविंद्र ने बताया कि मानसून के दाैरान शहर में पाैधाराेपण और वितरण काे लेकर आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी है। शहर में दाे लाख से अधिक पाैधे लगाए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि जयपुर नगर निगम में 150 वार्ड है। मानसून के दौरान नगर निगम प्रत्येक वार्ड को 700 पौधे उपलब्ध करवाएगा। इसके लिए नगर निगम 1 लाख से अधिक पौधों की खरीद करेगा। नगर निगम ने पौधों की खरीद के लिए टेंडर सहित अन्य प्रक्रियाएं शुरू कर दी है। नगर निगम द्वारा विभिन्न विकास समितियों, जनप्रतिनिधियों, एनजीओ सहित अन्य के माध्यम से शहर में पौधारोपण करवाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार जयपुर में हर साल जयपुर विकास प्राधिकरण और निगम के अलावा वन विभाग द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर लाखों पौधे लगाए जा रहे है। इसके बाद भी जयपुर में साल दर साल पॉल्यूशन स्तर बढ़ता जा रहा है। राजधानी जयपुर में आमजन को साल में 20 दिन ही शुद्ध हवा नसीब हो रही है। जहरीली हवा में मौजूद बारीक कण सिर्फ फेफड़े ही नहीं दिमाग की नसों तक पहुंच रहे हैं। किडनी तक डैमेज होने का खतरा बढ़ रहा है।
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम की ताजा रिपोर्ट बताती है कि जयपुर का हर नागरिक अपनी औसत उम्र के 3 साल 10 महीने और 24 दिन सिर्फ जहरीली हवा के कारण कम कर रहा है। रिपोर्ट में सामने आया कि जहरीली हवा में इतने खतरनाक कण मौजूद हैं, जो सांस से हमारे शरीर में जा रहे हैं। इससे प्रदेश के हर व्यक्ति की उम्र औसतन 3 साल 3 महीने और 18 दिन घट रही है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट में राजस्थान का भिवाड़ी प्रदूषण के मामले में देश का 7वां सबसे प्रदूषित शहर रहा था। सबसे ज्यादा आबादी राजधानी जयपुर में रहती है। जयपुर में रहने वाले लोग औसत से भी 7 महीने ज्यादा उम्र खो रहे हैं। अगर आप जयपुर में रह रहे हैं, तो लगभग 1,424 दिन प्रदूषण की भेंट चढ़ रहे हैं। इसका मतलब यह है कि जयपुर का हर तीसरा दिन प्रदूषण के उस खतरनाक स्तर पर होता है, जिसके संपर्क में लंबे समय तक रहने पर सांस और हार्ट संबंधी रोग हो सकते हैं। जयपुर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए 344.7 करोड़ खर्च किए गए। इसके बावजूद पीएम10 (धूल के कणों) का स्तर अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। जहां 2017-18 में बेस वैल्यू लगभग 170 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी, वहीं 2021-22 में इसमें गिरावट देखी गई। लेकिन हाल के वर्षों में यह फिर से बढ़कर 140 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के आसपास पहुंच गया है। यह स्तर सरकार द्वारा निर्धारित 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के सुरक्षित मानक से दो गुने से भी अधिक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

