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सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस पर अमित शाह बोले— ‘सहकार से समृद्धि’ ने बदली ग्रामीण भारत की तस्वीर

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सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस पर अमित शाह बोले— ‘सहकार से समृद्धि’ ने बदली ग्रामीण भारत की तस्वीर


सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस पर अमित शाह बोले— ‘सहकार से समृद्धि’ ने बदली ग्रामीण भारत की तस्वीर


जयपुर/नई दिल्ली, 06 जुलाई (हि.स.)। सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद देश में सहकारिता क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है। ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र के साथ किसानों, पशुपालकों, महिलाओं और ग्रामीण भारत के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। तकनीक, पारदर्शिता और नवाचार के माध्यम से सहकारी व्यवस्था को मजबूत बनाया गया है।

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित समारोह में अमित शाह ने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े परिवर्तन संभव हैं। इसी सोच के साथ सहकारिता क्षेत्र में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए ई-पैक्स विकसित किए गए, जिससे कार्य संचालन और ऑडिट प्रक्रिया आसान हुई है। साथ ही डिजिटल पेमेंट सिस्टम लागू होने से भुगतान व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है।

शाह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन ने किसानों, पशुपालकों और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया है।

उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है, इसलिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके राष्ट्रवादी विचारों ने देश की एकता और अखंडता को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर डॉ. मुखर्जी के सपने को साकार किया।

समारोह में वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारिता आज करोड़ों किसानों, पशुपालकों, महिलाओं और युवाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुकी है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में सहकारिता आंदोलन गांव-गांव और ढाणी-ढाणी तक पहुंच चुका है। प्रदेश में वर्तमान में 42 हजार से अधिक सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे 1 करोड़ 35 लाख से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। हाल ही में चलाए गए सदस्यता अभियान के तहत 8 लाख 90 हजार नए सदस्य जोड़े गए हैं, जिससे प्रदेश का सहकार परिवार और मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान का डेयरी सहकारिता मॉडल लाखों पशुपालक परिवारों की आय का प्रमुख आधार बन चुका है। राज्य में घाटे में चल रहे डेयरी संघ अब लाभ में आ गए हैं और राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) ने 10 हजार करोड़ रुपये का रिकॉर्ड टर्नओवर हासिल किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 9 लाख 40 हजार दुग्ध उत्पादक सदस्य सहकारिता से जुड़े हैं, जिनमें 4 लाख 20 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हैं। हजारों नए दुग्ध संग्रह केंद्र और नई दुग्ध उत्पादक समितियां शुरू होने से दूध उत्पादन बढ़ा है। प्रदेश का दैनिक दुग्ध संकलन 38 लाख लीटर से बढ़कर 45 लाख लीटर तक पहुंच गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सहकारिता को तकनीक से जोड़ने के लिए बड़े स्तर पर ई-पैक्स प्रणाली लागू की गई है। अब तक 5 हजार 646 पैक्स का कम्प्यूटरीकरण कर उन्हें ई-पैक्स बनाया जा चुका है। इनके माध्यम से 10 करोड़ से अधिक ऑनलाइन लेनदेन हो चुके हैं, जो पूरे देश में सर्वाधिक हैं और राष्ट्रीय कुल ट्रांजेक्शन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 4 हजार 875 पैक्स तीन या उससे अधिक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इनके माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और जन औषधि केंद्र जैसी सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में सहकारी समिति गठन की योजना के तहत अब तक 5 हजार 279 नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन किया गया है। इनमें 1 हजार 977 एम-पैक्स बनाकर राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की सदस्यता दिलाने में भी राजस्थान ने पहला स्थान प्राप्त किया है।

समारोह के दौरान राजस्थान को सहकारिता क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात मिली। इनमें 10 नए अन्न भंडारण गोदामों का शिलान्यास, 50 गोदामों का लोकार्पण, 100 गोदामों का राज्य भंडारण निगम को हस्तांतरण, जयपुर के सुमेल गांव में 64 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाले ‘सहकार वन’ का ई-भूमि पूजन शामिल है। इस सहकार वन में खेजड़ी, रोहिड़ा, नीम सहित स्थानीय प्रजातियों के पौधे मियावाकी और सामान्य पद्धति से लगाए जाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान देशभर में 50 हजार पैक्स को ई-पैक्स में परिवर्तित करने की शुरुआत की गई। साथ ही अन्न भंडारण योजना के तहत 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का लोकार्पण तथा 47 गोदामों का शिलान्यास किया गया। भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का ई-भूमि पूजन भी किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पोर्टल 3.0, जियो टैग मोबाइल एप, एनडीडीबी के दूध सप्लाई समीक्षा डैशबोर्ड, को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन मल्टी स्टेट लिमिटेड तथा गोमय सहकारी समिति मल्टी स्टेट लिमिटेड का शुभारंभ किया गया। समारोह में सहकारिता मंत्रालय की पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तकों का विमोचन तथा सहकारिता प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया।

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, मुरलीधर मोहोल, गौतम कुमार, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित सहकारिता एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े अनेक वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित