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उदयपुर में एलिवेटेड रोड के लिए कटने वाले 40 पेड़ों को बचाया

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उदयपुर में एलिवेटेड रोड के लिए कटने वाले 40 पेड़ों को बचाया


उदयपुर, 10 अप्रैल (हि.स.)। उदयपुर शहर के सबसे व्यस्त उदियापोल चौराहे पर गुरुवार देर रात एक अनोखा और प्रेरणादायक अभियान देखने को मिला। आमतौर पर विकास कार्यों के दौरान सबसे पहले पेड़ों की कटाई होती है, लेकिन इस बार उदयपुर नगर निगम ने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश करते हुए करीब 40 पेड़ों को काटने के बजाय सुरक्षित रूप से दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्णय किया।

दरअसल, शहर में सिटी रेलवे स्टेशन से कलेक्टर बंगले तक करीब 136 करोड़ रुपए की लागत से 2.7 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड का निर्माण कार्य चल रहा है। इस सड़क के लिए 117 पिलर्स बनाए जाने हैं, जिनमें से कुछ पिलर्स उदियापोल चौराहे के बीचों-बीच बनने हैं। ऐसे में वहां लगे पेड़ों को हटाना आवश्यक हो गया था।

नगर निगम ने पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें जड़ों सहित सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने का फैसला लिया। गुरुवार रात करीब 11 बजे से इस विशेष ऑपरेशन की शुरुआत हुई। मौके पर बड़ी क्रेन, जेसीबी और ट्रेलर तैनात किए गए। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना स्वयं देर रात तक मौके पर मौजूद रहकर पूरे अभियान की निगरानी करते रहे। पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से निकालने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली गई। जाने—माने वृक्ष विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. चौधरी की देखरेख में एमएम एग्रोटेक की टीम ने पेड़ों के चारों ओर तीन से चार फीट गहरा गड्ढा खोदकर जड़ों को मिट्टी सहित सुरक्षित निकाला। इसके बाद क्रेन की सहायता से पेड़ों को सावधानीपूर्वक उठाकर ट्रेलर पर रखा गया और करीब एक किलोमीटर दूर नेहरू बाल उद्यान पहुंचाया गया।

नेहरू बाल उद्यान में पहले से ही सात से आठ फीट गहरे गड्ढे तैयार कर उनमें खाद और उपजाऊ मिट्टी डाली गई थी, ताकि पेड़ों को तुरंत वहां रोपित किया जा सके। गुरुवार रात छह पेड़ों को सफलतापूर्वक शिफ्ट किया गया, जबकि शेष पेड़ों को अगले दो-तीन दिनों में स्थानांतरित किया जाएगा। इन पेड़ों में अधिकांश पाम ट्री हैं, जिनकी बाजार कीमत करीब दो लाख रुपए तक है। सभी पेड़ों की कुल कीमत 60 लाख रुपए से अधिक आंकी गई है, जबकि निगम ने मात्र करीब सवा लाख रुपए खर्च कर इन्हें बचाने का निर्णय किया है।

नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने कहा कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। उदयपुर जैसे पर्यटन शहर के लिए हरियाली उसकी पहचान है और इसे बचाने के लिए निगम हर संभव प्रयास करता रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता