(अपडेट) राजस्थान पंचायत चुनाव: कहीं प्रत्याशी के पति की पिटाई, कहीं मतदान का बहिष्कार; कई जिलों में वोटिंग के दौरान हंगामा
जयपुर, 22 अक्टूबर (हि.स.)। गांव की सरकार चुनने के लिए मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें लगीं, लेकिन पहले चरण के पंचायतीराज चुनाव में कई जगह विवाद, मारपीट और मतदान के बहिष्कार ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। कहीं निर्दलीय प्रत्याशी के पति और एक अन्य युवक पर हमला हुआ, तो कहीं परिसीमन और पंचायत की दूरी से नाराज ग्रामीणों ने वोट डालने से इनकार कर दिया। कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम खराब होने से मतदान भी बाधित हुआ।
गुरुवार को प्रदेश की 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों के लिए हुए मतदान में 85 लाख 7 हजार 306 मतदाताओं ने 6926 प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद कर दिया।
जोधपुर जिले की फलोदी पंचायत समिति की ढढू ग्राम पंचायत में मतदान के दौरान विवाद हो गया। इसमें निर्दलीय प्रत्याशी मैना विश्नोई के पति हनुमान विश्नोई और प्रकाश धतरवाल घायल हो गए। दोनों को पुलिस अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उनका उपचार कराया गया। घायल प्रकाश धतरवाल ने आरोप लगाया कि वह मतदान करने पहुंचे थे, तभी 20 से 25 लोगों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हनुमान विश्नोई चुनाव में अपनी पत्नी के पोलिंग एजेंट भी थे।
फलोदी थाना प्रभारी नरेश निर्वाण के अनुसार पुलिस घायलों के बयान दर्ज कर रही थी। बयान और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने बताया कि मतदान स्थल पर बाद में शांति रही।
पाली जिले की रानी पंचायत समिति के डूठारिया गांव में परिसीमन के बाद दूसरी ग्राम पंचायत से जोड़े जाने के विरोध में ग्रामीण मतदान से दूर रहे। ग्रामीणों का कहना था कि नए पंचायत क्षेत्र तक पहुंचने में दूरी और रास्ते की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने गांव को पुरानी पंचायत से जोड़ने या अलग ग्राम पंचायत बनाने की मांग की। पाली जिले के सोजत क्षेत्र के नेपावास गांव में भी मतदान बहिष्कार की सूचना सामने आई।
वहीं, कोटा जिले की इटावा क्षेत्र की सिनोता ग्राम पंचायत के चकटोडी-टोडीखेड़ली गांव के लोगों ने भी मतदान का बहिष्कार किया। ग्रामीणों के अनुसार, उनके गांव को पहले ढीपरी चंबल ग्राम पंचायत से हटाकर सिनोता में जोड़ दिया गया है, जो करीब 11 किलोमीटर दूर है। उनका कहना था कि जंगल वाले रास्ते के कारण बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी होती है। ग्रामीणों ने गांव को वापस ढीपरी चंबल ग्राम पंचायत में जोड़ने की मांग की।
जोधपुर जिले की ग्राम पंचायत मंगलसिंह नगर में ओबीसी आरक्षण को लेकर नाराज लोगों ने मतदान करने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम ने पंचायत चुनाव में स्थानीय प्रशासनिक फैसलों और आरक्षण से जुड़े मुद्दों की भूमिका को भी सामने ला दिया। डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा पंचायत समिति की भीलूड़ा ग्राम पंचायत के बूथ संख्या 88 पर ईवीएम में तकनीकी खराबी के कारण करीब दो घंटे मतदान बाधित रहा। सुबह 7 बजे मतदान शुरू होने के बाद 9:41 बजे मशीन में खराबी आई। नई ईवीएम सुबह 11:50 बजे पहुंचने के बाद मतदान फिर शुरू हुआ। इस दौरान कुछ मतदाताओं को इंतजार करना पड़ा और कुछ के बिना वोट डाले लौटने की बात भी सामने आई।
बीकानेर जिले की आडूरी ग्राम पंचायत के बूथ संख्या 19 पर कतार में खड़ी एक महिला मतदाता की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह गिर पड़ी। घटना के बाद मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सुविधा और आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर भी ध्यान गया। अलवर जिले की बाम्बोली पंचायत के एक बूथ पर निर्दलीय प्रत्याशी हिम्मत सिंह ने कांग्रेस के पक्ष में कथित फर्जी मतदान का आरोप लगाया। एक मतदाता सुनील ने भी दावा किया कि जब वह वोट डालने पहुंचा तो उसे बताया गया कि उसके नाम से पहले ही मतदान हो चुका है। इसके बाद समर्थकों ने हंगामा किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति शांत कराई।
पाली जिले के बगड़ी नगर पंचायत क्षेत्र के केलवाद बूथ संख्या 52 पर भी मतदान अधिकारी पर भाजपा के पक्ष में मतदान करवाने का आरोप लगाया गया। पोलिंग एजेंट महिपाल सिंह ने इस संबंध में लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप था कि एक दिव्यांग महिला का वोट कांग्रेस के बजाय भाजपा को दिलवाया गया।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शाम छह बजे तक बीकानेर में 71.44 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि जयपुर में 67.60 प्रतिशत, अलवर में 64.89 प्रतिशत, कोटा में 64.15 प्रतिशत और उदयपुर में 63.81 प्रतिशत मतदान हुआ। जोधपुर में 62.91 प्रतिशत, भीलवाड़ा में 61.20 प्रतिशत और डूंगरपुर में 61.11 प्रतिशत मतदान हुआ।
वहीं, अजमेर में 46.09 प्रतिशत और पाली में 47.94 प्रतिशत मतदान हुआ। बाड़मेर में 53.03 प्रतिशत, नागौर में 56.68 प्रतिशत, राजसमंद में 57.59 प्रतिशत, सिरोही में 55.66 प्रतिशत और झालावाड़ में 68.35 प्रतिशत मतदान हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

