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सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए उमड़ेगी श्रद्धा

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सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए उमड़ेगी श्रद्धा


जयपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व सर्वपितृ अमावस्या शनिवार, 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसके साथ ही 26 सितंबर से शुरू हुए पितृ पक्ष का समापन होगा। इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से सर्वपितृ अमावस्या को विशेष माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा के हस्त नक्षत्र में एक साथ होने से गजच्छाया योग का संयोग बन रहा है। उनके अनुसार, ऐसा संयोग करीब 60 साल बाद बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

पंडित बनवारी लाल शर्मा के अनुसार अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे तक रहेगी। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या का मुख्य श्राद्ध और तर्पण कर्म 10 अक्टूबर को किया जाएगा। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध भी किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो।

सर्वपितृ अमावस्या पर गायत्री परिवार की ओर से जयपुर में विभिन्न स्थानों पर नि:शुल्क सामूहिक श्राद्ध-तर्पण, पिंडदान और गायत्री यज्ञ आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार, पूजन और तर्पण की आवश्यक सामग्री आयोजन स्थलों पर उपलब्ध रहेगी। श्रद्धालुओं से अपने साथ दो स्टील के तसले लाने का अनुरोध किया गया है।

गायत्री शक्तिपीठ, ब्रह्मपुरी में सुबह 7 बजे से कार्यक्रम शुरू होगा। व्यवस्थापक सोहन लाल शर्मा ने बताया कि यज्ञ में पितरों के निमित्त विशेष आहुतियां दी जाएंगी।

श्री गायत्री वेदना निवारण केंद्र, मानसरोवर के किरण पथ पर भी सुबह 7 बजे से सामूहिक तर्पण और गायत्री यज्ञ होगा। व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रत्येक परिवार से एक प्रतिनिधि को तर्पण में शामिल होने की अनुमति रहेगी।

गायत्री शक्तिपीठ, कालवाड़ में सुबह 7 से 9 बजे तक श्राद्ध-तर्पण और पिंडदान होगा। इसके बाद सुबह 9 से 11 बजे तक पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ आयोजित किया जाएगा। मुख्य प्रबंध ट्रस्टी धर्म सिंह ने आयोजन की जानकारी दी।

वहीं मुरलीपुरा-दादी का फाटक के समीप एक्सप्रेस हाईवे पुलिया के पास तोंदवाल मैरिज गार्डन में गायत्री चेतना केंद्र की ओर से कार्यक्रम होगा। मनु महाराज के अनुसार, यहां सुबह 7 से 9 बजे तक तर्पण और सुबह 9 से 10 बजे तक पंचकुंडीय महायज्ञ होगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या पर पुत्र, पौत्र, भतीजा या भांजा श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। जिन परिवारों में पुरुष सदस्य नहीं हैं, वहां महिलाएं भी विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान कर सकेंगी। इस दिन श्रद्धालु पितरों की स्मृति में ब्राह्मण भोजन, अन्न-वस्त्र दान और जरूरतमंदों की सेवा भी करते हैं। मान्यता है कि इन कार्यों से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश