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राष्ट्र मंदिर प्रकल्प ने गुमनाम क्रान्तिकारियों को किया जीवन्त : राज्यपाल कटारिया

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राष्ट्र मंदिर प्रकल्प ने गुमनाम क्रान्तिकारियों को किया जीवन्त : राज्यपाल कटारिया


उदयपुर, 06 अप्रैल (हि.स.)। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचन्द कटारिया ने कहा कि नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र में स्थापित “राष्ट्र मंदिर” प्रकल्प ने देश के गुमनाम क्रान्तिकारियों के योगदान को सजीव रूप में सामने लाकर उन्हें नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति और त्याग की प्रेरणा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राज्यपाल कटारिया सोमवार को नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र में स्थापित राष्ट्र मंदिर प्रकल्प का अवलोकन कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती के 18 मानस पुत्रों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। इन गुमनाम क्रान्तिकारियों के त्याग और समर्पण को जन-जन तक पहुंचाने के लिए दानवीर स्वर्गीय महाशय धर्मपाल के पुत्र राजीव गुलाटी ने उनके सिलिकॉन स्टेच्यू का निर्माण कराकर एक प्रेरणादायी पहल की है। उन्होंने कहा कि यह प्रकल्प आज राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है।

कटारिया ने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने अपने जीवन को समाज सुधार और राष्ट्र जागरण के लिए समर्पित किया। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक अस्पृश्यता और अंधविश्वास के उन्मूलन के लिए उनके प्रयास ऐतिहासिक रहे। उनकी प्रेरणा से अनेक क्रान्तिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। राष्ट्र मंदिर के माध्यम से उनके जीवन और बलिदान को प्रदर्शित कर नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का सार्थक प्रयास किया गया है।

इस अवसर पर श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य ने कहा कि कटारिया का नवलखा महल से प्रारम्भ से ही गहरा जुड़ाव रहा है। यह वही ऐतिहासिक स्थल है, जहां मेवाड़ के महाराणा सज्जन सिंह के निमंत्रण पर महर्षि दयानन्द सरस्वती ने लगभग साढ़े छह माह प्रवास कर अपनी प्रसिद्ध कृति सत्यार्थ प्रकाश की रचना की थी।

नवलखा महल आगमन पर राज्यपाल कटारिया का उपरणा, पगड़ी और तिलक से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में न्यास के मंत्री भवानीदास आर्य, जन सम्पर्क सचिव विनोद कुमार राठौड़, कार्यालय मंत्री भंवर लाल गर्ग, पुरोहित नवनीत आर्य, सरला गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, हरीश आर्य, हेमा आर्य, लेखाकार दिव्येश सुथार, एनएमसीसी संयोजक दुर्गा गोरमात, देवीलाल पारगी, लक्ष्मण लाल खराड़ी, रेखा, कालूलाल मीणा, निरमा मीणा एवं न्यास के कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता