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राजस्थान पंचायत चुनाव: कहीं पद्मश्री विजेता हारे, कहीं महंत ने मारी बाजी; सोशल मीडिया की लोकप्रियता भी नहीं आई काम

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राजस्थान पंचायत चुनाव: कहीं पद्मश्री विजेता हारे, कहीं महंत ने मारी बाजी; सोशल मीडिया की लोकप्रियता भी नहीं आई काम


जयपुर, 31 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान में पंचायत चुनाव के नतीजों ने गांवों की सियासत की दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। कहीं पद्मश्री से सम्मानित प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा, तो कहीं मठ के महंत ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की। सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स रखने वाले चर्चित चेहरे भी चुनावी मैदान में मतदाताओं का भरोसा जीतने में सफल नहीं रहे। शुक्रवार देर रात तक चली मतगणना के बाद शनिवार को प्रदेश की 3,625 ग्राम पंचायतों में उपसरपंच चुनने के लिए मतदान जारी रहा।

राजसमंद जिले की पिपलांत्री ग्राम पंचायत में पद्मश्री से सम्मानित श्यामसुंदर पालीवाल को सरपंच चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें 2021 में पद्मश्री मिला था। चुनाव में नवीन पालीवाल ने जीत दर्ज की और उन्हें 1,348 वोट मिले। श्यामसुंदर पालीवाल 492 वोट के अंतर से चुनाव हार गए। यह परिणाम क्षेत्र में चर्चा का विषय है।

भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा पंचायत समिति की फूलिया खुर्द ग्राम पंचायत में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी कोमल साहू चुनाव में तीसरे स्थान पर रहीं। उन्हें केवल 277 वोट मिले।

पवन साहू के इंस्टाग्राम पर करीब 70 लाख फॉलोअर्स और यूट्यूब पर 2.7 करोड़ सब्सक्राइबर्स बताए गए हैं। इसके बावजूद उनकी पत्नी को चुनाव में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। यहां भगवतीलाल सोनी ने 1,203 वोट लेकर जीत दर्ज की, जबकि पूर्व सरपंच कालूराम जाट को 797 वोट मिले।

जोधपुर जिले की ओसियां पंचायत समिति की खेतासर ग्राम पंचायत में पूर्व मंत्री शंभू सिंह खेतासर की पत्नी बदन कंवर को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें हीरा देवी प्रजापत ने 173 वोट से हराया।

हीरा देवी को 885 और बदन कंवर को 712 वोट मिले। बदन कंवर पहले प्रधान भी रह चुकी हैं।

दूसरी ओर, उम्मेद नगर पंचायत समिति की खारड़ा मेवासा ग्राम पंचायत में मेवासा मठ के महंत संत गिरी ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की। उन्हें 1,580 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रामदेव को 1,070 वोट प्राप्त हुए।

जोधपुर जिले की बावड़ी पंचायत समिति की लवेरा कलां ग्राम पंचायत में सोशल मीडिया पर ‘हिम्मता बा’ के नाम से चर्चित हिम्मताराम सरपंच चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें 450 वोट मिले। यहां गणपत राम ने 1,264 वोट लेकर जीत हासिल की, जबकि सुरेंद्र पाल सिंह 1,155 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

कोटा जिले की कूकड़ा खुर्द ग्राम पंचायत में मतगणना के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर सुरेश मीणा की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई। इस घटना के कारण कुछ समय के लिए मतगणना प्रभावित रही, जिसे बाद में रिजर्व रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरा करवाया। यहां संदीप सिंह 195 वोट से सरपंच निर्वाचित हुए।

पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद कुछ स्थानों पर मतगणना को लेकर विवाद भी सामने आए।

दौसा जिले की बांदीकुई क्षेत्र की महूखेड़ा पंचायत में हारने वाली प्रत्याशी के समर्थकों ने दोबारा मतगणना की मांग की। पीचूपाड़ा पंचायत में सरपंच पद पर जीत का अंतर केवल दो वोट रहा, जिसके बाद पराजित प्रत्याशी के समर्थकों ने पुनर्गणना की मांग उठाई।

जालोर जिले की आलासन ग्राम पंचायत में भी मतगणना के बाद दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। वहीं अलवर जिले के राजगढ़ क्षेत्र के राजपुरबड़ा गांव में चुनाव परिणाम को लेकर विवाद के दौरान पुलिस पर पथराव की खबर सामने आई, जिसमें पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना है।

सरपंच चुनाव के बाद शनिवार को दूसरे चरण की 3,625 ग्राम पंचायतों में उपसरपंच पद के लिए मतदान कराया जा रहा है। इस चुनाव में वार्ड पंच मतदान करते हैं और आम मतदाता सीधे वोट नहीं डालते। नामांकन प्रक्रिया के बाद मतदान और मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।

हालांकि, जोधपुर जिले की भावी ग्राम पंचायत में सरपंच और वार्ड पंचों के लिए 2 नवंबर को दोबारा मतदान निर्धारित किया गया है। इसके चलते वहां उपसरपंच का चुनाव अब 3 नवंबर को होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित