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राजस्थान के प्रसिद्ध कव्वाल मोहम्मद सिद्दीक को समर्पित रहा फेस्टिवल

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राजस्थान के प्रसिद्ध कव्वाल मोहम्मद सिद्दीक को समर्पित रहा फेस्टिवल


जयपुर, 25 मार्च (हि.स.)। स्वागत जयपुर फाउंडेशन और नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 'सोलफुल कव्वाली फेस्टिवल' के अंतिम दिन बुधवार को जवाहर कला केंद्र का कृष्णायन सभागार सूफियाना कलामों से मुखरित हो उठा। कार्यक्रम में जयपुर की मौलाना जियाउद्दीन साहब की दरगाह के चौकी के कव्वाल उस्ताद अनवार हुसैन नियाजी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पारंपरिक सूफी रचनाओं को रूहानी अंदाज में अपने सुरों पर सजाकर महफिल को लूट लिया।

जैसे ही महफिल की शुरुआत हुई, माहौल पूरी तरह सूफियाना रंग में रंग गया। अनवार हुसैन ने कौल के जरिए कार्यक्रम को परवान चढ़ाया। इसके बाद उन्होंने भजन की रचना 'ख्वाजा जी थारी अखियन से बरसे गुलाल...,' को प्रस्तुत कर साम्प्रदायिक सौहार्द का माहौल बनाया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हजरत अमीर खुसरो का मशहूर कलाम 'ऐ री सखी मोरे पिया घर आए...' रहा। कव्वालों ने इस कलाम को इतनी दिलकश अदायगी के साथ पेश किया कि पूरा वातावरण भाव-विभोर हो उठा। श्रोतागण झूमने पर मजबूर हो गए और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा।

कव्वाली के दौरान हारमोनियम, तबला और ढोलक की संगत ने प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया। हर एक कलाम में सूफी परंपरा की झलक साफ दिखाई दी, जिसने श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। कलाकारों ने श्रोताओं की फरमाइश पर ख्वाजा साहब की शान में मनकबत पेशकर समां बांधा। उस्ताद अनवार हुसैन के साथ साथ सह-गायन पर मुनव्वर हुसैन नियाजी, हारमोनियम पर वाहिद हुसैन, कोरस पर शादाब हुसैन नियाजी, कोरस पर नवेद हुसैन और अशरफ हुसैन, तबले पर पर दानिश हुसैन और ढोलक पर नदीम खान ने सधि हुई संगत की। स्वागत जयपुर फाउंडेशन अध्यक्ष इकबाल खान नियाजी ने बताया कि यह फेस्टिवल राजस्थान के प्रसिद्ध कव्वाल उस्ताद मोहम्मद सिद्दीक को समर्पित रहा। इससे पूर्व उस्ताद अनवार हुसैन और उनके साथियों का बुके देकर वेलकम किया गया। संचालन रहमान हरफनमौला ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश