युवा पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों और ऐतिहासिक घटनाक्रमों के प्रति जागरूक करना जरूरी- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
जयपुर, 25 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का काम किया। संविधान की रक्षा में लोकतंत्र सेनानियों का अविस्मरणीय योगदान है। उन्होंने कहा कि इतिहास के उन घटनाक्रमों को याद रखना बेहद जरूरी है जब देश के लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को न केवल नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि देश को जेलखाना तक बना दिया गया था।
मुख्यमंत्री गुरुवार को राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान ऑडिटोरियम, दुर्गापुरा में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान की भावना की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे सभी इन विभूतियों के राष्ट्र के प्रति संघर्ष एवं समर्पण को आत्मसात् करें।
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों की मासिक पेंशन को 5 हजार रुपये बढ़ाकर 25 हजार रुपये तथा मासिक चिकित्सा सहायता को 1 हजार रुपये बढ़ाकर 5 हजार रुपये करने की घोषणा की। उन्होंने कहा राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। प्रदेश में हमारी सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि को तत्काल प्रभाव से बहाल किया।
उन्होंने कहा की आपातकाल के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेई, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और राजनाथ सिंह जैसे लगभग 1 लाख से अधिक नेताओं, स्वयंसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को बिना मुकदमे चलाएं जेल में कैद कर दिया था। राजस्थान से भैरोंसिंह शेखावत, जगदीश प्रसाद माथुर, सतीश चंद्र अग्रवाल और राजेंद्र गहलोत जैसे अनेक कार्यकर्ताओं को भी जेल में यातनाएं सहनी पड़ी। इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने के साथ न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मीडिया पर सेंसरशिप जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष एवं समर्पण की मूल भावना के अनुरूप ही यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में लोकतंत्र एवं संविधान मजबूत बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने संविधान दिवस मनाने की शुरुआत कर संविधान निर्माताओं का सम्मान किया। साथ ही संविधान के शिल्पी बाबा साहब भीमराव अंबेडकर से जुड़े स्थानों को पंचतीर्थ बनाकर उन्हें सम्मान देने का काम किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने स्वार्थ की खातिर आपातकाल लगाया और संविधान की हत्या की। आज कांग्रेस पार्टी संविधान की दुहाई देती है और संविधान को बचाने का पाखंड करती है। लेकिन कांग्रेस ने लोकतंत्र के रक्षक नहीं बल्कि भक्षक बनने का काम किया। इनके मंसूबे सिर्फ भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के मंसूबे हैं और राष्ट्र के हित में कांग्रेस ने कभी काम नहीं किया। कांग्रेस ने देश में चुनी हुई सरकारों को भंग करने का काम किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने हमारे देश को स्वतंत्र कराया था और लोकतंत्र सेनानियों ने हमारे संविधान को बचाने का काम किया है। आपातकाल के दौरान हुए अत्याचार से नई पीढ़ी को हमें अवगत कराना चाहिए कि जब कोई व्यक्ति संविधान की आत्मा को कुचलता है तो देश को किस तरह बुरे नतीजे भुगतने पड़ते हैं। हमारी नई पीढ़ी को भारतीय लोकतंत्र का गला घोंटने वाले इस घटनाक्रम को परिचय कराना होगा।
राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था। लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना संभव हो सकी। समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लागू थी तथा नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान जबरन नसबंदी अभियान चलाया गया, जिससे आम जनता में भय और असंतोष का वातावरण उत्पन्न हुआ।
उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के साहस का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद कार्यकर्ताओं ने भूमिगत रहकर जनजागरण का कार्य जारी रखा। वर्ष 1977 के आम चुनाव में जनता ने आपातकाल के विरुद्ध अपना स्पष्ट जनादेश दिया और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना हुई। लोकतंत्र सेनानियों का योगदान देश सदैव स्मरण रखेगा।
राज्यसभा सांसद एवं लोकतंत्र सेनानी घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि आपातकाल की पृष्ठभूमि गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन और बिहार के छात्र-युवा आंदोलन से तैयार हुई थी, जिसका नेतृत्व लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री के चुनाव को अवैध घोषित किए जाने के बाद लोकतांत्रिक संकट और गहरा गया था। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी गिरफ्तार किया गया तथा उन्होंने भूमिगत रहकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए कार्य किया। लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और अधिकारों को कानूनी संरक्षण प्रदान करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया।
पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक अशोक परनामी ने कहा कि 25 जून 1975 की आधी रात को देश पर थोपा गया आपातकाल हमारे लोकतांत्रिक इतिहास पर काला धब्बा है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई लड़ने वालों को जेल में डाला और यातनाएं दीं।
समारोह में उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, लोकसभा सांसद मंजू शर्मा, विधायक गोपाल शर्मा, बालमुकुंद आचार्य, पूर्व मंत्री नाथू सिंह गुर्जर, प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी, भूपेन्द्र सैनी सहित अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

