बिश्नोई समाज ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सानिध्य में किया पौधारोपण
जोधपुर, 10 जुलाई (हि.स.)। प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और जीवों के प्रति करुणा का अद्भुत संगम हुआ जब परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष परमार्थ पीठाधीश्वर, स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में राजस्थान की पावन धरती पर बिश्नोई समाज ने पौधारोपण कर एक विराट पर्यावरणीय जन-अभियान का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर स्वामी के 75वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 75 हजार पौधे लगाने का संकल्प लिया गया तथा अभियान के प्रथम पौधे का रोपण स्वामी के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि वृक्ष केवल प्रकृति की धरोहर नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों का जीवन हैं। आज विश्व जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, जल संकट और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों का सबसे सरल, प्रभावी और स्थायी समाधान वृक्षारोपण तथा वृक्षों का संरक्षण है। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना महत्वपूर्ण है, किन्तु उससे भी अधिक आवश्यक है उसकी वर्षों तक उसी प्रकार देखभाल करना, जैसे परिवार के किसी सदस्य की की जाती है।
बिश्नोई समाज की पर्यावरणीय चेतना की सराहना करते हुए कहा कि बिश्नोई समाज केवल वृक्ष नहीं लगाता, बल्कि प्रकृति के साथ जीने की संस्कृति का संरक्षण करता है। सदियों पूर्व गुरु जम्भेश्वरजी द्वारा स्थापित जीवन मूल्यों ने प्रकृति संरक्षण, जीव दया और पर्यावरणीय संतुलन का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जिसे आज आधुनिक पर्यावरण विज्ञान भी अनुकरणीय मानता है। विशेष रूप से खेजड़ी (शमी) सहित अनेक वृक्षों का संरक्षण, उनका रोपण तथा वर्षों तक उनका पालन-पोषण बिश्नोई समाज की अद्वितीय पहचान है।
उन्होंने कहा कि बिश्नोई समाज हिरण, चिंकारा, काला हिरण, नीलगाय, मोर, खरगोश तथा असंख्य पक्षियों को अपने परिवार का सदस्य मानकर उनकी सेवा करते हैं। घायल एवं बीमार वन्यजीवों का उपचार, उनके लिए भोजन एवं जल की व्यवस्था तथा भीषण गर्मी में पक्षियों और पशुओं के लिए जल पात्र रखना उनकी संस्कृति का अभिन्न अंग है। वास्तव में बिश्नोई समाज ने मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वही भारत की सनातन संस्कृति का वास्तविक स्वरूप है।
इस अभियान के प्रथम चरण में पूज्य स्वामी के पावन सान्निध्य में 11,00 पौधों का रोपण कर इस अभियान का शुभारम्भ किया। यह भी घोषणा की गई कि यह अभियान सम्पूर्ण मानसून अवधि में निरन्तर चलता रहेगा तथा हजारों पौधों को रोपित कर उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया।
इस अवसर पर न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय विनीत माथुर, निदेशक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, जोधपुर घनश्याम सोनी सहित अनेक विशिष्ट अतिथि सहित कई लोग मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

