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गुरु पूर्णिमा पर बीकानेर में पांडुलिपि डिजिटाइजेशन इकाई का शुभारंभ

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गुरु पूर्णिमा पर बीकानेर में पांडुलिपि डिजिटाइजेशन इकाई का शुभारंभ


बीकानेर, 29 जुलाई (हि.स.)। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बीकानेर स्थित आनंद आश्रम में ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपि डिजिटाइजेशन इकाई का शुभारंभ किया गया। यह शुभारंभ क्षमाराम महाराज के सान्निध्य एवं आशीर्वाद में वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन के साथ संपन्न हुआ।

इस अवसर पर क्षमाराम महाराज ने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियां देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक विरासत का अमूल्य आधार हैं। उनका संरक्षण केवल इतिहास को सुरक्षित रखने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक भारत के शाश्वत ज्ञान को पहुंचाने का राष्ट्रीय दायित्व भी है। उन्होंने ज्ञान भारतम् मिशन के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण अभियान बताया।

ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपि डिजिटाइजेशन कार्य में राजस्थान वर्तमान में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। राजस्थान सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की सचिव सूची त्यागी के निर्देशन में प्रदेशभर में 15 डिजिटाइजेशन केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनमें बीकानेर के तीन केंद्र भी सक्रिय रूप से पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन और संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप राजस्थान इस अभियान में देश में प्रथम स्थान पर पहुंचा है। साथ ही प्रदेश में पांच नए डिजिटाइजेशन केंद्र शीघ्र शुरू किए जाने की तैयारी अंतिम चरण में है।

ज्ञान भारतम् मिशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि नई इकाई के माध्यम से बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में उपलब्ध दुर्लभ पांडुलिपियों का अत्याधुनिक उपकरणों से डिजिटाइजेशन तथा वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण किया जाएगा। इससे यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रहने के साथ-साथ शोधार्थियों और विद्वानों के लिए भी अधिक सुलभ हो सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजीव