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खजूर की खेती से बीकानेर के किसानों की बढ़ी आय, 75 प्रतिशत अनुदान से बढ़ रहा रकबा

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खजूर की खेती से बीकानेर के किसानों की बढ़ी आय, 75 प्रतिशत अनुदान से बढ़ रहा रकबा


बीकानेर, 19 जुलाई (हि.स.)। पश्चिमी राजस्थान में खजूर की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। जिले में इस समय लगभग 350 हेक्टेयर क्षेत्र में खजूर के बगीचे हैं। इस वर्ष बेहतर उत्पादन और 50 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक के अच्छे बाजार भाव मिलने से किसानों का रुझान खजूर की खेती की ओर बढ़ा है।

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित 'पश्चिमी राजस्थान में खजूर पौधारोपण क्षेत्रफल विस्तार' योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। किसान प्रति पौधा 80 से 100 किलोग्राम तक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं तथा दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब सहित अन्य राज्यों में खजूर का विपणन कर अच्छा लाभ कमा रहे हैं।

प्रगतिशील किसान शिवकरण कूकणा, जय भगवान, ओ.पी. हर्ष, बृजमोहन चांडक और केसरीचंद भूरा ने बताया कि इस वर्ष अच्छी पैदावार और बेहतर बाजार भाव के कारण खजूर उत्पादन से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उपनिदेशक उद्यान (अनुसंधान एटीसी) प्रेमाराम ने बताया कि विभाग द्वारा खजूर बगीचा स्थापना पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। टिश्यू कल्चर पौधों पर प्रति पौधा अधिकतम तीन हजार रुपये अथवा इकाई लागत का 75 प्रतिशत तथा ऑफशूट पौधों पर निर्धारित इकाई लागत का 75 प्रतिशत अनुदान देय है। उन्होंने बताया कि एक हेक्टेयर में 148 मादा और 8 नर सहित कुल 156 पौधों की आवश्यकता होती है। बरही, खुनैजी, मेडजूल, खलास, खद्रावी, सगई, जामली, अजवा, नाबुत सुल्तान और हलावी जैसी मादा किस्मों तथा अल-इन-सिटी एवं घनामी नर किस्मों पर ही अनुदान उपलब्ध है।

विभाग के अनुसार एक किसान को न्यूनतम 0.5 हेक्टेयर और अधिकतम 4 हेक्टेयर क्षेत्र में खजूर पौधारोपण पर अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली अनिवार्य है। आवेदन के साथ जमाबंदी, नक्शा, सिंचाई स्रोत का प्रमाण, ड्रिप आवेदन, मिट्टी एवं पानी की जांच रिपोर्ट, बैंक खाते का विवरण तथा आधार अथवा जनाधार कार्ड सहित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

उद्यान विभाग ने बताया कि ऑफशूट पौधे राजकीय फार्म सगरा भोजका (जैसलमेर), मैकेनाइज्ड कृषि फार्म खारा (बीकानेर), कृषि विश्वविद्यालयों तथा गुणवत्तायुक्त पौधे उपलब्ध कराने वाले किसानों से प्राप्त किए जा सकते हैं। वहीं टिश्यू कल्चर पौधे डीबीटी से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं अथवा अतुल राजस्थान डेटपाम लिमिटेड, जोधपुर से उपलब्ध हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव