आयुर्वेद विवि में नाड़ी परीक्षण कोर्स की ऑफलाइन ट्रेनिंग शुरू
जोधपुर, 17 अगस्त (हि.स.)। स्नातकोत्तर क्रिया शारीर विभाग, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक माह के सेमी-ऑनलाइन नाड़ी परीक्षण प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम के छह दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के अभिनंदन के साथ हुआ। पाठ्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर (डॉ.) दिनेश चंद्र शर्मा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। तत्पश्चात प्रतिभागियो ने अपना आत्म परिचय दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविन्द सहाय शुक्ल ने की। अपने संबोधन में उन्होंने महर्षि चरक के आयुर्वेद में अतुलनीय योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा को वर्तमान संदर्भों में समझना तथा उसका निरंतर अभ्यास आवश्यक है। इसके पश्चात नाड़ी परीक्षण के छह दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया।
महाराष्ट्र के सोलापुर के नाड़ी विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) शिल्पा यर्मे द्वारा प्रतिभागियों को नाड़ी परीक्षण की बारीकियों, नाड़ी के विभिन्न आयामों तथा रोग निदान में नाड़ी की भूमिका के संबंध में विस्तृत प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष प्रदर्शन एवं व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से नाड़ी परीक्षण की विभिन्न तकनीकों को समझाया गया।
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) महेंद्र कुमार शर्मा, प्रो. (डॉ.) गोविंद प्रसाद गुप्ता, प्रो. (डॉ.) देवेंद्र सिंह चाहर, प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार अदलखा, डॉ. राकेश कुमार शर्मा, रसायनशाला के डॉ विजय पाल त्यागी सहित अन्य संकाय सदस्य, विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी तथा क्रिया शारीर एवं अन्य विभागों के समस्त पी.जी. विद्यार्थी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

