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पंजाब विधानसभा में बाजवा ने कर्मचारियों तथा पेंशनरों के डीए मुद्दे पर सरकार को घेरा

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- विधायक इयाली ने उठाया जेलों में बंद सिखों की रिहाई का मुद्दा

चंडीगढ़, 04 अगस्त (हि.स.)। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर कर्मचारियों तथा पेंशनरों का डीए जारी करने के संबंध में दिए गए फैसले पर आज नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने सदन में सरकार को घेरा। विधानसभा में शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने सवाल उठाया कि कल पंजाब एंड हाई कोर्ट ने मुलाजिमों के हक में फैसला दिया। डीए संबंधी फैसला दिया है। डबल बेंच का फैसला आया है।

उन्होंने कहा कि स्पीकर साहिब से पूछा जाए कि सरकार 15 दिन में पैसे देगी या सुप्रीम कोर्ट जाएगी। या फिर अगली सरकार इसका जवाब देगी। दूसरा मेरा सवाल है कि हमारे हड़ताली कर्मचारियों को पक्का करने का वादा था। इस समय क्या कोई आश्वासन देंगे? क्या उन्हें चुनाव आचार संहिता लगने से पहले पक्का करेंगे। स्पीकर ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया, जिसका प्रताप बाजवा व अन्य विपक्षी नेताओं ने विरोध किया। स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि शून्यकाल में मुद्दा उठाया जाता है। तय नियमों के अनुसार इसका जवाब दे दिया जाएगा।

इस दौरान मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई के लिए मुख्यमंत्री को मांग पत्र दिया गया था। उन्हें पैरोल भी मिलनी चाहिए और रिहाई भी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को पैरोल दे देती है, लेकिन बंदी सिंहों को पैरोल नहीं मिली। उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी के नेता सांसद अमृतपाल सिंह जेल में बंद हैं। उनसे एनएसए हटा दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद वे अभी भी जेल में हैं। उनका सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (एमपी लैड) फंड भी रुका हुआ है। सरकार अदालत में जाकर जवाब दे, ताकि उनका एमपी लैड फंड जारी हो सके।

मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह ने नीड-बेस्ड पॉलिसी को लेकर सवाल किया। इस पर मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां का जवाब था कि मामला विचाराधीन है। कमेटी बना दी गई है। इस पर विधायक ने कहा कि जवाब तसल्लीबख्श नहीं है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा का कहना है कि पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने डीए संबंधी मुलाजिमों के हक में फैसला सुनाया है। सरकार साफ करें कि डीए देगी या सुप्रीम कोर्ट जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा