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पंजाब विधानसभा में एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ प्रस्ताव पारित

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- सरकार का तर्क योग्य नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए पेश किया प्रस्ताव

चंडीगढ़, 23 अक्टूबर (हि.स.)। पंजाब विधान सभा में शुक्रवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों के संशोधन के दौरान योग्य नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग वाला महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। यह प्रस्ताव वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने पेश किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक प्राधिकरणों से यह भी अपील की गई कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूचियों में मौजूद खामियों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रत्येक योग्य नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान समानता, न्याय और जनता की सर्वोच्चता के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा, संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 चुनाव प्रणाली की निगरानी करने, मतदाता सूचियों में भेदभाव रोकने और वयस्क मताधिकार की गारंटी संबंधी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार एक विशेष लोकतांत्रिक अधिकार है, जो गरीबों, श्रमिकों, दलितों, अल्पसंख्यकों और समाज के हर वर्ग को देश के शासन में समान भागीदारी का अवसर देता है। मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नागरिकों के नाम हटाए जाने और योग्य मतदाताओं के मतदान के अधिकार से वंचित होने संबंधी उठाई गई आपत्तियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मतदाता सूचियों के संशोधन ने देश के विभिन्न हिस्सों में चुनाव प्रक्रिया की अखंडता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दिल्ली और अन्य राज्यों में मतदाता सूचियों से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए मंत्री ने उन शिकायतों को उजागर किया, जिनमें विरोधी दलों के समर्थकों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को जानबूझकर निशाना बनाया गया था। उन्होंने ऐसी शिकायतों की गहन और निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में बनी मतदाता सूचियों में सामने आई अनियमितताओं की जांच करने और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पड़ताल करने के लिए एक स्वतंत्र, पारदर्शी और भरोसेमंद प्रणाली स्थापित करने की मांग की।

मंत्री ने कहा कि मतदान का अधिकार केवल एक प्रशासनिक रस्म नहीं है बल्कि यह आम नागरिक की आवाज है और लोकतंत्र में समान भागीदारी की स्पष्ट अभिव्यक्ति है। इस प्रस्ताव के द्वारा पंजाब विधान सभा ने केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक प्राधिकरणों से अपील की है कि वे मतदान के अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करें, मतदाता सूचियों में सामने आई खामियों की निष्पक्षता से जांच करवाएं और जहां भी अनियमितताएं पाई जाएं, वहां जवाबदेही तय की जाए।

प्रस्ताव का समर्थन करते हुए विधायक इंदरजीत कौर मान (नकोदर), डॉ. इशांक कुमार (चब्बेवाल), मनप्रीत सिंह इयाली (दाखा), डॉ. अमनदीप कौर (मोगा), रूपिंदर सिंह हैप्पी (बस्सी पठाना), डॉ. नछत्तर पाल (नवांशहर), अमनशेर सिंह शेरी कलसी (बटाला), प्रो. बलजिंदर कौर (तलवंडी साबो), अमोलक सिंह (जैतो) और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने भी सदन में अपने विचार साझा किए।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा