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जालंधर के हॉस्टल से हथियारों का जखीरा मिलने के मामले में तीन कश्मीरी छात्रों को 10-10 साल की कैद

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जालंधर के हॉस्टल से हथियारों का जखीरा मिलने के मामले में तीन कश्मीरी छात्रों को 10-10 साल की कैद


मोहाली, 04 जून (हि.स.)। एनआईए

की विशेष अदालत ने आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े तीन कश्मीरियों को

10-10 साल की कैद और 1.10

लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों को देश विरोधी

साजिश रचने, गैरकानूनी

गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, आर्म्स

एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी करार दिया। इसी मामले में सुहैल अहमद भट को पहले ही बरी किया जा चुका है।

यह मामला 10 अक्टूबर, 2018 का है, जब पंजाब पुलिस को सूचना मिली थी कि

जालंधर स्थित सीटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के हॉस्टल

में रहने वाले कुछ कश्मीरी छात्र संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। सूचना के आधार

पर पुलिस ने छापेमारी कर तीन छात्रों यासिर रफीक भट, जाहिद

गुलजार और मोहम्मद इदरीस शाह को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उनके

कब्जे से एक एके-47 राइफल,

माउजर पिस्तौल, दर्जनों कारतूस और करीब एक किलोग्राम

विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी।

प्रारंभिक जांच में आतंकी संगठन अंसार

गजवत-उल-हिंद से संबंधों के संकेत मिलने के बाद मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी को

सौंप दिया गया। एनआईए ने जांच के दौरान मोबाइल फॉरेंसिक डाटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टेलीग्राम चैट, ईमेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्य

जुटाए। जांच में सामने आया कि आरोपित आपस में ऑनलाइन माध्यमों से संपर्क में थे और

गतिविधियों का संचालन कर रहे थे।

अदालत में सुनवाई के

दौरान अभियोजन पक्ष ने 62 गवाह

पेश किए, जिनमें जांच अधिकारी,

फॉरेंसिक विशेषज्ञ, कॉलेज प्रशासन से जुड़े लोग और अन्य

संबंधित व्यक्ति शामिल थे। हालांकि कुछ गवाह अपने पुराने बयानों से मुकर गए,

लेकिन अदालत ने वैज्ञानिक और भौतिक

साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए तीनों आरोपितों को दोषी ठहराया।

अदालत ने अपने फैसले

में कहा कि तीनों प्रतिबंधित आतंकी संगठन के सक्रिय सदस्य थे और हथियारों तथा

विस्फोटक सामग्री के जरिए देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी कर रहे

थे। मामले में यासिर रफीक भट का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा, क्योंकि जांच में वह आतंकी जाकिर मूसा

का चचेरा भाई बताया गया। उसके मोबाइल से संगठन से जुड़ी सामग्री, हथियारों की तस्वीरें और अन्य डिजिटल

साक्ष्य बरामद हुए थे। अदालत ने डिजिटल रिकॉर्ड, हथियारों की बरामदगी और अन्य साक्ष्यों

को दोषसिद्धि का प्रमुख आधार मानते हुए तीनों को सजा सुनाई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH