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श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून में संशोधन पर पंजाब सरकार ने अकाल तख्त को दी जानकारी

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- सात सदस्यीय सरकारी पैनल और एसजीपीसी की पांच सदस्यीय समिति के बीच जल्द शुरू हो सकती है औपचारिक बातचीत

चंडीगढ़, 01 अक्टूबर (हि.स.)। पंजाब सरकार ने ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026’ में संभावित बदलावों पर विचार-विमर्श के लिए गठित सात सदस्यीय कमेटी के संबंध में अकाल तख्त के जत्थेदार को औपचारिक तौर पर जानकारी दी है। इसके साथ ही सरकार की कमेटी और एसजीपीसी के पांच सदस्यीय पैनल के बीच बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

इससे पहले सात सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ करीब दो घंटे बैठक की थी। यह बैठक मुख्य रूप से सदस्यों के आपसी परिचय और आगे की कार्ययोजना पर केंद्रित रही। तय किया गया कि कमेटी पहले अपने स्तर पर कानून से जुड़े मुद्दों और प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा करेगी, जिसके बाद एसजीपीसी की समिति के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।

सरकार ने पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को दोनों समितियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।

सात सदस्यीय पैनल में पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, सेवानिवृत्त जस्टिस जसपाल सिंह, सेवानिवृत्त जस्टिस गुरबीर सिंह, पूर्व IPS अधिकारी एवं पूर्व पंजाब लोक सेवा आयोग चेयरमैन जतिंदर सिंह औलख और लॉ ऑफिसर प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल हैं। यह समिति पंजाब सरकार ने 16 सितंबर को गठित की थी।

मुख्यमंत्री भगवंत मान और ज्ञानी रघबीर सिंह पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि कानून की धाराओं और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा तथा आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं, लेकिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के खिलाफ कानून के मूल उद्देश्य को कमजोर नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि सख्त सजा से जुड़े प्रमुख प्रावधानों को बनाए रखने के पक्ष में सरकार है।

अकाल तख्त और पीसीएस ने इस कानून की कुछ धाराओं, शब्दावली और प्रक्रियात्मक प्रावधानों पर आपत्तियां जताई थीं। इसी के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू की गई। पंजाब विधानसभा ने इस संशोधित कानून को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता और सम्मान की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों को सख्त करने के उद्देश्य से पारित किया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH