श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने पाकिस्तान पंजाब की मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
- लाहौर के वॉल्ड सिटी स्थित लाल कुआं, कटारी चंदू सहित सिख ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की मांग
अमृतसर, 23 सितंबर (हि.स.)। श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार एवं तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने पाकिस्तान पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ को पत्र लिखकर लाहौर के वॉल्ड सिटी क्षेत्र में स्थित सिख ऐतिहासिक विरासत स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण की मांग की है। पत्र में विशेष रूप से लाल कुआं, कटारी चंदू का उल्लेख किया गया है, जिसे श्री गुरु अर्जन देव जी की शहादत से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल बताया गया है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र की एक प्रति पाकिस्तान के प्रांतीय मंत्री और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा को भी भेजी गई है। जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि पत्र का उद्देश्य किसी सरकार, संस्था या व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि लाहौर से जुड़ी साझा ऐतिहासिक विरासत और सिख इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने कहा कि लाहौर सिख इतिहास के लिए कोई दूर या सीमांत स्थान नहीं है। शहर में सिख गुरुओं की स्मृतियों, सिख शहीदों के बलिदान और सिख परंपरा से जुड़े अनेक ऐतिहासिक अध्यायों के साथ उनके भौतिक अवशेष भी मौजूद रहे हैं। समय के बदलाव, शहरी विकास, विभाजन और अन्य ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण इनमें से कई निशानियां लुप्त हो चुकी हैं या अपने मूल स्वरूप में नहीं बची हैं। ऐसे में जो ऐतिहासिक अवशेष आज भी मौजूद हैं, उनका संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
जत्थेदार ने पाकिस्तान पंजाब सरकार की ओर से क्षेत्र के कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के संरक्षण और उन्हें दोबारा खोलने के लिए विशेष धनराशि उपलब्ध करवाने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों को उसी भावना के साथ पूरा किया जाना चाहिए, जिसके तहत इन्हें शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि लाहौर की वॉल्ड सिटी में स्थित लाल कुआं, कटारी चंदू के संबंध में सिख संगत की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब को जानकारी दी गई है। स्थल के आसपास निर्माण गतिविधियों को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। हालांकि, जत्थेदार ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय मामले की आधिकारिक तथ्य-जांच करवाने की मांग की।
पत्र में पाकिस्तान पंजाब सरकार से मांग की गई है कि लाल कुआं, कटारी चंदू की मौजूदा स्थिति की तत्काल जांच करवाई जाए। यदि वहां किसी प्रकार का निर्माण या बदलाव किया जा रहा है, तो जांच पूरी होने तक उसे रोक दिया जाए। साथ ही वॉल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी, पुरातत्व विभाग और संबंधित विभागों के विशेषज्ञों से इस स्थल के ऐतिहासिक एवं विरासत महत्व की जांच करवाने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने जांच प्रक्रिया में सिख इतिहास के विशेषज्ञों और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की बात कही। यदि स्थल का ऐतिहासिक महत्व प्रमाणित होता है तो उसे कानूनी तौर पर विरासत स्थल के रूप में संरक्षित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
इसके अलावा लाहौर की वॉल्ड सिटी में सिख इतिहास से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों का व्यापक विरासत सर्वेक्षण करवाने, उनकी वर्तमान स्थिति, ऐतिहासिक महत्व, स्वामित्व और कानूनी स्थिति का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया गया है। जत्थेदार ने कहा कि यदि किसी ऐतिहासिक स्थल का आज केवल छोटा-सा हिस्सा ही बचा है, तो उसका महत्व केवल उसके भौतिक स्वरूप से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी ऐतिहासिक स्मृति से भी निर्धारित होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान पंजाब सरकार, वॉल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इस मामले को विरासत संरक्षण के दृष्टिकोण से गंभीरता से लेंगी।
उन्होंने अपील की कि मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी सिख संगत और सिख संस्थाओं के साथ साझा की जाए। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय चाहता है कि लाहौर में सिख गुरुओं और सिख शहीदों से जुड़े सभी सुरक्षित ऐतिहासिक अवशेषों को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखा जाए। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर उसकी जानकारी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब को भी दी जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

