'सतलुज' फिल्म पर प्रतिबंध के विरोध में एसजीपीसी का प्रदर्शन, अमृतसर में मार्च निकाला
- एडवोकेट धामी बोले-किसी फिल्म पर रोक लगाने से इतिहास और सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता
अमृतसर, 10 जुलाई (हि.स.)।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और मानवाधिकारों के लिए उनके संघर्ष पर आधारित फिल्म 'सतलुज' पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार को अमृतसर में विरोध मार्च निकाला। श्री दरबार साहिब के घंटाघर प्लाजा से डिप्टी कमिश्नर कार्यालय तक निकाले गए इस मार्च के बाद पंजाब के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने कठिन दौर में लापता युवाओं और कथित फर्जी अंतिम संस्कारों से जुड़े रिकॉर्ड एकत्र कर मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों को दबाने के लिए उनका अपहरण किया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। धामी ने आरोप लगाया कि भाई खालड़ा के जीवन, उनके संघर्ष और 1980 के दशक के बाद सिख युवाओं के साथ हुई कथित ज्यादतियों को दर्शाने वाली फिल्म 'सतलुज' पर रिलीज के कुछ समय बाद ही प्रतिबंध लगाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि किसी फिल्म पर रोक लगाने से इतिहास और सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता।
एसजीपीसी अध्यक्ष ने भाई जसवंत सिंह खालड़ा मामले में सजा काट रहे एक पुलिस अधिकारी के प्रति सरकार की नरमी पर भी सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि एक ओर सजा पूरी कर चुके या निर्धारित अवधि से अधिक समय जेल में बिता चुके सिख बंदियों के मामलों पर निर्णय नहीं लिया जा रहा, जबकि दूसरी ओर दोषी पुलिस अधिकारियों को राहत देने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बलवंत सिंह राजोआणा, जगतार सिंह हवारा सहित अन्य बंदी सिखों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनसे जुड़े मामलों की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भाई जगतार सिंह हवारा की अपनी वृद्ध माता से मिलने के लिए मांगी गई पैरोल पर भी अभी तक निर्णय नहीं हुआ है।
धामी ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के आह्वान के अनुसार 14 जुलाई को सतलुज नदी के किनारे आयोजित होने वाले अरदास समागम में संगत से शामिल होने की अपील की। साथ ही उन्होंने सरकार से फिल्म 'सतलुज' पर लगाया गया प्रतिबंध तत्काल हटाकर इसे दोबारा रिलीज करने की मांग की, ताकि नई पीढ़ी पंजाब के इतिहास और उस दौर की घटनाओं से परिचित हो सके।
विरोध मार्च के बाद एसजीपीसी के पदाधिकारियों और सदस्यों ने फिल्म पर लगे प्रतिबंध को हटाने तथा सिख युवाओं से जुड़े मामलों में न्याय सुनिश्चित करने की मांग वाला ज्ञापन अमृतसर की अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर पल्लवी मिश्रा को सौंपा। इसमें एसजीपीसी के कई पदाधिकारी, सदस्य और कर्मचारी शामिल रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

