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पंजाब विधानसभा में स्कूली शिक्षा के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

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- शिक्षा मंत्री बोले, पंजाब में 58 हजार विदेशी छात्र कर रहे पढ़ाई

चंडीगढ़, 06 अगस्त (हि.स.)। पंजाब विधानसभा में कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने विधानसभा में कहा कि पंजाब पहले कई क्षेत्रों में अग्रणी राज्य था, लेकिन धीरे-धीरे केंद्र सरकार की ओर से अधिकारों का केंद्रीकरण बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि अब 'वन नेशन-वन एजुकेशन' की नीति भी जीएसटी की तर्ज पर लाई जा रही है। कई राज्यों ने इसे पूरी तरह अपनाने से इनकार किया है।

खैहरा ने आरोप लगाया कि आज पंजाब के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की शिक्षा नीति पर भी केंद्र का प्रभाव बढ़ रहा है, जो राज्यों के अधिकारों पर चोट हैं। उन्होंने मांग की कि विधानसभा से एक प्रस्ताव पारित कर शिक्षा को फिर से स्टेट लिस्ट में शामिल करने की मांग केंद्र सरकार के सामने रखी जाए।

विधानसभा में निर्दलीय विधायक राणा इंद्र प्रताप सिंह ने युवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में 30 लाख ग्रेजुएट हैं। करीब 20 प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं। हाल में नीट परीक्षा विवाद ने दिखाया कि जब छात्र एकजुट होकर अपनी बात रखते हैं तो सरकार को फैसला बदलना पड़ता है। पंजाब के युवाओं ने भी इस आंदोलन में भागीदारी की। पंजाब की यूनिवर्सिटीज में पिछले करीब 40 वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। इन्हें जल्द कराया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को लोकतांत्रिक नेतृत्व का अवसर मिले।

कांग्रेस विधायक अरूणा चौधरी ने कहा कि शिक्षामंत्री ने अच्छा काम किया है। हालांकि असल हकीकत भी बतानी चाहिए। उन्होंने अपने एरिया कॉलेज की हालत बताई। राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी खुलनी चाहिए। एजुकेशन का बुरा हाल है। हमें सोचना चाहिए कि रैगुलेटरी अथॉरिटी होनी चाहिए। उन पर बाद में हमारा अंकुश नहीं रहता है। हाजिरी कम होने पर डेढ़ लाख दो हाजिरी पूरी हो जाती हैं।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब धीरे-धीरे एजुकेशन हब के रूप में उभर रहा है। देशभर में करीब 58 हजार विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। पंजाब की सरकारी यूनिवर्सिटीज में भी नेपाल, अफ्रीकी देशों, अफगानिस्तान और अन्य देशों के विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। बैंस ने कहा कि यह पंजाब की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास है। 2021-22 के बाद शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव शुरू हुए और सरकार ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे तथा सुविधाओं में सुधार पर विशेष ध्यान दिया। वर्ष 2021-22 में एक अधिकारी की नियुक्ति के बाद सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार शुरू हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा