पंजाब विधानसभा स्पीकर का कबूलनामा, चिट्टा खत्म करने की गारंटी पूरी नहीं कर सके
कोटकपूरा, 01 सितंबर (हि.स.)। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कोटकपूरा में लोक मिलनी कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि आम आदमी पार्टी सरकार राज्य से चिट्टा खत्म करने की अपनी गारंटी पूरी नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई चुनावी वादे पूरे किए हैं, लेकिन सिंथेटिक नशे यानी चिट्टे की समस्या अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
संधवां ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने महिलाओं और परिवारों के बीच अपनी बात रखते हुए इस बात को स्वीकार किया कि सरकार अपनी उस गारंटी को पूरा नहीं कर सकी, जिसमें राज्य से चिट्टा खत्म करने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, विधानसभा स्पीकर ने यह भी दावा किया कि मौजूदा सरकार नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के विपरीत अब कोई स्थानीय राजनीतिक नेता, विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री नशा तस्करों को संरक्षण नहीं दे रहा है।
संधवां ने नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए एक विवादित प्रस्ताव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आदतन नशा तस्करी करने वाले आरोपितों की जमानत प्रक्रिया को मुश्किल बनाने के लिए कदम उठाने की योजना है। इसके तहत प्रमुख शहरों के चौराहों पर ऐसे लोगों के नाम सार्वजनिक करने का प्रस्ताव रखा गया है, जो अदालत में गिरफ्तार नशा तस्करों की जमानत या जमानती बनने के लिए आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि जब पुलिस नशा बेचने वालों को गिरफ्तार करती है, तो कई बार उनके परिवार और रिश्तेदार यह कहकर उनकी रिहाई की मांग करते हैं कि आरोपी केवल नशे का आदी है। संधवां ने परिवारों से अपील की कि वे नशे के कारोबार में शामिल लोगों को कानूनी राहत दिलाने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करें।
विधानसभा स्पीकर ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई के जरिए नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज और परिवारों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों पर ध्यान देने और उन्हें आध्यात्मिक तथा सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की, ताकि वे नशे की गिरफ्त में आने से बच सकें।
संधवां के इस बयान के बाद विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता और जिला अध्यक्ष बब्बू बराड़ ने कहा कि विधानसभा स्पीकर का सार्वजनिक तौर पर सरकार की नशा विरोधी मुहिम की कमी स्वीकार करना इस अभियान की जमीनी हकीकत को सामने लाता है। उन्होंने इसे सरकार के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर का संकेत बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

