पंजाब में वकीलों के चैंबरों को भी मिलेगा मुफ्त बिजली योजना का लाभ
चंडीगढ़, 20 जुलाई (हि.स.)। पंजाब सरकार ने अदालत परिसरों में स्थित पात्र वकीलों के चैंबरों को भी घरेलू बिजली आपूर्ति टैरिफ योजना के दायरे में शामिल कर लिया है। अब राज्य के वकीलों को अपने चैंबरों में इस्तेमाल होने वाली बिजली के लिए कम भुगतान करना होगा।
आम आदमी पार्टी ने वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं से सभी घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की गारंटी दी थी। मार्च, 2022 में सत्ता में आने के बाद पार्टी ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह कल्याणकारी योजना लागू कर दी थी। सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत पंजाब के करीब 90 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली का बिल नहीं देना पड़ रहा है।
पीएसपीसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब अपने चैंबरों से काम करने वाले वकीलों को भी इस योजना में शामिल कर लिया गया है।वकीलों के चैंबरों को घरेलू बिजली टैरिफ का लाभ देने का निर्णय कुछ समय पहले लिया गया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका था। अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी पीएसपीसीएल ने पात्र आवेदनों की जांच कर उन्हें 48 घंटे के भीतर निपटाने का फैसला किया है।
पीएसपीसीएल ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है। इसके तहत पंजाब के विभिन्न अदालत परिसरों में स्थित पात्र वकीलों के चैंबरों को घरेलू बिजली आपूर्ति टैरिफ का लाभ दिया जाएगा। जिन चैंबरों में दो महीने के दौरान बिजली की खपत 600 यूनिट तक होगी, उनका बिजली बिल शून्य आएगा।
हालांकि, यदि किसी चैंबर की बिजली खपत दो महीने में 600 यूनिट से अधिक हो जाती है, तो संबंधित उपभोक्ता को इस्तेमाल की गई पूरी बिजली का बिल चुकाना होगा। इस बीच, अधिसूचना को लागू करने में हो रही देरी और लापरवाही की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पीएसपीसीएल के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर बसंत गर्ग ने सभी सब-डिवीजन कार्यालयों के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को पात्र आवेदन प्राप्त होने के दो दिनों के भीतर उनकी जांच कर निपटारा सुनिश्चित करने को कहा गया है।
वकीलों के चैंबरों को घरेलू बिजली आपूर्ति टैरिफ का लाभ देने का फैसला राज्यभर के वकीलों द्वारा यह मामला मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के संज्ञान में लाए जाने के बाद लिया गया। यह लाभ केवल उन अधिवक्ताओं के चैंबरों को मिलेगा, जो पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल में पंजीकृत हैं। इसके साथ ही चैंबर का अदालत परिसर के भीतर स्थित होना और उसका इस्तेमाल केवल वकालत से संबंधित काम के लिए किया जाना अनिवार्य होगा। कैंटीन, फोटोस्टेट सेंटर या किसी अन्य व्यावसायिक अथवा कारोबारी गतिविधि के लिए इस्तेमाल किए जा रहे चैंबर इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

