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पंजाब में सरकार और 3 लाख कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ा

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चंडीगढ़, 29 अगस्त (हि.स.)। पंजाब में आम आदमी पार्टी (आआपा)सरकार और करीब 3 लाख सरकारी कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। 27 अगस्त को सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल में शामिल हुए करीब 2,500 कर्मचारियों की सूची सरकार ने तैयार कर ली है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इन कर्मचारियों की गैरहाजिरी का कोई उचित कारण सामने नहीं आया है। अब सेवा नियमों के तहत निलंबन, फोर्स लीव, वेतन कटौती या अन्य विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

कर्मचारी बकाया डीए, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने समेत 8 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। 27 अगस्त की महाहड़ताल के बाद सरकार ने कर्मचारी नेताओं के साथ बैठक तय की थी। बैठक पहले पंजाब भवन चंडीगढ़ और बाद में जालंधर के पीएपी परिसर में रखी गई।

हालांकि बैठक से करीब एक घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि पहले हड़ताल खत्म करनी होगी, उसके बाद बातचीत होगी। कर्मचारी नेता पीएपी परिसर पहुंचे, लेकिन मुख्यमंत्री बैठक में नहीं आए। कर्मचारियों से हड़ताल खत्म करने संबंधी वीडियो जारी करने को कहा गया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद बैठक रद्द कर दी गई। इसके बाद सरकार ने सभी विभागों के सचिवों से हड़ताल के दौरान बिना उचित कारण ड्यूटी से गैरहाजिर रहे कर्मचारियों की सूची मांगी। अब इसी आधार पर कार्रवाई की तैयारी है।

वहीं कर्मचारी संगठनों ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है। सरकारी कर्मचारियों के साझा मोर्चे की लुधियाना में बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे के संघर्ष की रणनीति और सरकार की कार्रवाई के खिलाफ अगले कदम का ऐलान किया जा सकता है। इसी बीच कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ सोशल मीडिया पर अनफॉलो मुहिम शुरू कर दी है। कर्मचारी नेताओं की ओर से फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम पर मुख्यमंत्री को अनफॉलो करने की अपील की जा रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें बैठक के लिए बुलाने के बावजूद मुख्यमंत्री ने बातचीत नहीं की।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH