पीएसपीसीएल ने 10 हजार करोड़ रुपये कर्ज लेने का फैसला टाला
- बैंकों से 5,500 करोड़ रुपये का लोन मिलने के बाद फिलहाल कार्यशील पूंजी की जरूरत पूरी होने का दावा
चंडीगढ़, 02 अक्टूबर (हि.स.)। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बॉन्ड और नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर के जरिए 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने की योजना फिलहाल रोक दी है। यह फैसला पीएसपीसीएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में लिया गया।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड की बैठक में बताया गया कि बिजली निगम पहले ही बैंकों से 5,500 करोड़ रुपये का लोन हासिल करने में सफल रहा है। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल यह राशि निगम की कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। इस कर्ज के लिए मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया जाना था और इसके लिए करीब 150 करोड़ से 177 करोड़ रुपये तक की अरेंजर फीस दिए जाने का प्रस्ताव था। प्रस्ताव के तहत कर्ज राज्य सरकार की गारंटी के बिना जुटाया जाना था।
सूत्रों के अनुसार, बिजली निगम में नकदी की कमी को दूर करने के लिए कर्ज जुटाने की जरूरत बताई गई थी। यह स्थिति सब्सिडी की राशि मिलने में देरी और बिजली बिलों की बकाया राशि के कारण पैदा हुई थी। हालांकि, बुधवार की बैठक में बोर्ड सदस्यों को बताया गया कि बैंक बिना किसी अतिरिक्त फीस के पीएसपीसीएल को कर्ज देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में मर्चेंट बैंकर के माध्यम से कर्ज जुटाने की प्रक्रिया फिलहाल जरूरी नहीं रह गई।
10,000 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने के लिए पीएसपीसीएल की ओर से 15 जून को टेंडर जारी किया गया था, जबकि तकनीकी बोलियां 30 जुलाई को खोली गई थीं। योजना के तहत 5,000-5,000 करोड़ रुपये की दो किस्तों में कुल 10,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने थे। मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने के लिए तीन कंपनियों ने बोली लगाई थी। इनमें एके कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड, ट्रस्ट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड और रियल ग्रोथ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड शामिल थीं। तीनों कंपनियां भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड में पंजीकृत कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकर हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे कम बोली एके कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड ने लगाई थी। कंपनी ने कुल जुटाई जाने वाली राशि पर 1.5 प्रतिशत अरेंजर फीस की मांग की थी। बैंकों से 5,500 करोड़ रुपये का लोन मिलने के बाद पीएसपीसीएल बोर्ड ने फिलहाल 10,000 करोड़ रुपये की प्रस्तावित बाजार उधारी की आवश्यकता नहीं समझी है।
हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

