पंजाब में पांच प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे निजी स्कूल
-विधानसभा में पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑन अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक पास
चंडीगढ़, 10 अगस्त (हि.स.)। पंजाब विधानसभा में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार ने सोमवार को विधानसभा में मानसून सत्र के आखिरी दिन स्कूलों का फीस रेगुलेशन बिल पास करवा लिया। इस बिल के पास होने से स्कूलों पर पिछले 3 सालों में अभिभावकों से लिए 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी वाले पैसे वापस करने की तलवार लटक गई है।शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इसमें प्राइवेट शिक्षण संस्थानों की फीस बढ़ाने की सीमा तय की गई है। नए प्रावधान के तहत प्राइवेट संस्थान एक साल में अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। फीस में 5 प्रतिशत बढ़ोतरी करने के लिए संस्थान को 90 दिन पहले अभिभावकों को नोटिस देना होगा। साथ ही फीस बढ़ाने से जुड़ी पूरी जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन है कि फीस की कैपिंग आठ प्रतिशत तक रखी जा सकती है। सीएम साहब ने कहा कि कांग्रेस आठ प्रतिशत कैप कांग्रेन ड्रॉप कर दी। मुझे कोई नोटिफिकशेन दिखा दें, जिसमें यह ड्रॉप कर दिया था। पौने पांच साल सरकार को किसने रोका था।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि आज के समय उसे सेठ माना जाता है, जिसके बच्चे पढ़े-लिखे होते। उनके पास क्वालिटी एजुकेशन होती। पहले जमीन, प्लॉट, दुकान या शोरूम वालों को बड़ा माना जाता था। पढ़ाई में भी दो तरह की, गरीबों की किताबें अलगी थीं, अमीरों की किताबें और थीं। गरीबों और अमीरों के स्कूलों में टीचर भी अलग थे। गरीबों की पढ़ाई तो गाइडों पर निशानी लगाने तक सीमित रह गई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

