home page

पंजाब: तेज तूफान से 8500 बिजली के पोल और 1400 से ज्यादा ट्रांसफार्मर हुए जमींदोज

 | 
पंजाब: तेज तूफान से 8500 बिजली के पोल और 1400 से ज्यादा ट्रांसफार्मर हुए जमींदोज


चंडीगढ़, 13 जून (हि.स.)। पंजाब के विभिन्न हिस्सों में पिछले 36 घंटों के दौरान आए तेज आंधी-तूफान और तेज रफ्तार हवाओं ने बिजली ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रही और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।

प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, तूफान के कारण 8,492 से अधिक बिजली के खंभे, 1,466 ट्रांसफार्मर, लगभग 4 किलोमीटर हाई-टेंशन केबल और 220 किलोमीटर से ज्यादा लो-टेंशन तार क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा अन्य बिजली उपकरणों और ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। पीएसपीसीएल को करीब 19.54 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जिसे हाल के वर्षों में सबसे बड़े नुकसानों में से एक माना जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान राज्य के बॉर्डर और सेंट्रल जोन में दर्ज किया गया है।

पीएसपीसीएल अधिकारियों के मुताबिक तेज हवाओं के कारण बड़ी संख्या में बिजली के खंभे, ट्रांसफार्मर और पेड़ उखड़ गए, जिससे कई क्षेत्रों में बिजली सप्लाई ठप हो गई। कई इलाकों में लोगों को 10 घंटे से अधिक समय तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। विभाग को बड़ी संख्या में शिकायतें भी प्राप्त हुईं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तेज तूफान के कारण 220 केवी की सप्लाई लाइनें और ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की टीमें लगातार मरम्मत कार्य में जुटी हुई हैं और अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में बिजली बहाल कर दी गई है, जबकि बाकी इलाकों में भी जल्द आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों ने बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए बिजली ढांचे को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले ऐसे तूफान दो साल में एक-दो बार आते थे, लेकिन पिछले तीन वर्षों से हर साल दो से तीन बार भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इस तूफान का असर बिजली मांग पर भी पड़ा। गुरुवार शाम को पंजाब में बिजली की मांग अचानक 14,000 मेगावाट से घटकर करीब 3,170 मेगावाट रह गई, जिसके कारण ग्रिड से 3,700 मेगावाट की अंडर-ड्रॉअल स्थिति पैदा हो गई। मांग में भारी गिरावट के चलते पीएसपीसीएल को ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए थर्मल यूनिट्स का उत्पादन कम करना पड़ा।

हालांकि हालिया बारिश ने धान सीजन के दौरान कुछ राहत भी दी है। इंजीनियरों के अनुसार बारिश के कारण अगले कुछ दिनों तक ट्यूबवेलों के इस्तेमाल में कमी आ सकती है, जिससे बिजली की मांग पर भी असर पड़ेगा।

---

हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH