पंजाब के कैबिनेट मंत्री, अकाली व कांग्रेस नेताओं ने कराया डोप टेस्ट
- सरकारी अस्पताल में आमने-सामने हुए नेता
चंडीगढ़, 27 सितंबर (हि.स.)। पंजाब में विपक्षी दलों की ओर से नशा खोरी के आरोप लगाए जाने के बाद पंजाब के कैबिनेट मंत्री तरूणप्रीत सौंध ने रविवार को डोप टेस्ट करवाया। टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद मंत्री ने विपक्ष को घेरा, तो विपक्ष ने सैंपल लेने की प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिए हैं।
लुधियाना जिले के खन्ना में नशे के मुद्दे पर डोप टेस्ट चैलेंज रविवार को सरकारी अस्पताल में विवाद का कारण बन गया। कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध सुबह 11 बजे से 10 मिनट पहले अस्पताल पहुंचे। एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन के कमरे में उनका यूरिन सैंपल लिया गया, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। बाद में अकाली दल और कांग्रेस के नेता पहुंचे और मंत्री का सैंपल पहले लेने पर सवाल उठाए। एसएमओ के कमरे में नेताओं के बीच तीखी बहस हुई, जिससे हाथापाई की नौबत आ गई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली और मंत्री सौंध को बाहर निकाला। बाद में यादविंदर सिंह यादू और गुरकीरत सिंह कोटली ने भी डोप टेस्ट करवाया, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई।
कैबिनेट मंत्री सौंध ने डोप टेस्ट इसलिए करवाया, क्योंकि खन्ना की राजनीति में नशे के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने उन्हें खुला डोप टेस्ट चैलेंज दिया था। मामला तब शुरू हुआ जब मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध ने एक कार्यक्रम में पिछली सरकारों के कामकाज पर टिप्पणी की। इसके बाद अकाली दल के नेता यादविंदर सिंह यादू और कांग्रेस के पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली ने उन्हें बहस और डोप टेस्ट की चुनौती दी।
कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विरोधियों के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए जानबूझकर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष विकास के मुद्दे पर बहस नहीं कर सकता और अब डोप टेस्ट की चुनौती के बाद भी उनके पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। सौंध ने कहा कि उनकी रिपोर्ट जनता के सामने है।
अकाली दल के हलका इंचार्ज यादविंदर सिंह यादू ने आरोप लगाया कि मंत्री का सैंपल सही तरीके से नहीं लिया गया और इसी आधार पर गलत रिपोर्ट तैयार की गई। उन्होंने एसएमओ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मंत्री को अपनी रिपोर्ट पर पूरा भरोसा है तो वह उनके साथ पीजीआई और अंबाला जाकर भी डोप टेस्ट करवाएं। यादू ने कहा कि वह वहां अपना टेस्ट करवाकर रिपोर्ट सार्वजनिक करेंगे।
पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली ने आरोप लगाया कि मंत्री का सैंपल पारदर्शी तरीके से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि न तो सैंपल देने की प्रक्रिया लाइव की गई और न ही कैमरे के सामने जांच करवाई गई। कोटली ने सवाल उठाया कि यदि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी थी तो सैंपल लेने से लेकर जांच और रिपोर्ट तैयार होने तक की कार्रवाई कैमरे के सामने क्यों नहीं की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

