देश विभाजन के समय मारे गए पंजाबियों की याद में अकाल तख्त पर हुई अरदास
- जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने और सिख श्रद्धालुओं का कोटा बढ़ाने की मांग की
अमृतसर, 16 अगस्त (हि.स.)। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने रविवार को 1947 में देश के विभाजन और हिंसा के दौरान मारे गए पंजाबियों की याद में श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास की, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने हिस्सा लिया। इस मौके पर जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि बुजुर्गों ने 1947 के विभाजन को 'पंजाब दा उजाड़ा' कहा था। उन्होंने कहा कि उस दौर में दस लाख से अधिक पंजाबियों की जान गई थी।
जत्थेदार ने ज्ञानी सोहन सिंह सीतल की पुस्तक ‘पंजाब दा उजाड़ा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें विभाजन के समय हुई अनेक दर्दनाक घटनाओं का विवरण दर्ज है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब पर गुरु साहिब के समक्ष अरदास की गई कि ऐसा भयावह समय दोबारा कभी न लौटे। जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर करीब डेढ़ वर्ष से बंद है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान की सरकारों से सिख भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आपसी बातचीत के जरिए कॉरिडोर को जल्द से जल्द दोबारा खोलने की मांग की।
उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर द्विपक्षीय समझौते के तहत सिख श्रद्धालु जत्थों के रूप में ननकाना साहिब जाते हैं और बड़ी संख्या में संगत पाकिस्तान स्थित गुरुधामों के दर्शन करना चाहती है। जत्थेदार ने बताया कि एसजीपीसी को हाल ही में सिख जत्थों के लिए रिकॉर्ड संख्या में पासपोर्ट प्राप्त हुए हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान की सरकारों से तीर्थयात्रियों के मौजूदा कोटे को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सजाएं पूरी कर चुके सिख कैदियों की रिहाई और उनसे जुड़े लंबित मामलों के समाधान की भी मांग की।
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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

