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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की बड़ी जीत, अंकित बिधान बने अध्यक्ष

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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की बड़ी जीत, अंकित बिधान बने अध्यक्ष


- एसओआई के समर्थन से एबीवीपी ने दर्ज की जीत

- आआपा समर्थित एएसएपी दूसरे और एनएसयूआई तीसरे स्थान पर

- मतदान के दौरान लॉ विभाग में पुलिस-छात्रों के बीच झड़प

चंडीगढ़, 31 अगस्त (हि.स.)। पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है। एबीवीपी के उम्मीदवार अंकित बिधान ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया। इस चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के छात्र संगठन स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया ने एबीवीपी को समर्थन दिया था। अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले छात्र राजनीति में इसे अकाली दल और भाजपा से जुड़े संगठनों की अहम सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव 2026-27 में चार प्रमुख पदों के परिणाम घोषित किए गए हैं। अध्यक्ष पद पर अंकित ने 3,149 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्हें आदिल बराड़ के 2,637, गुरमन सिंह सिद्धू के 2,263 और दर्शप्रीत सिंह के 1,387 वोट मिले, जबकि नोटा को 174 वोट पड़े। उपाध्यक्ष पद पर अरमान सिंह (भिंडर) 3,322 वोटों के साथ विजयी रहे। उन्हें आरांक्शा ठाकुर के 2,818, विपुल भादू के 1,284, मनमीत कौर के 1,053 और अरमान सिंह के 652 वोट मिले, जबकि नोटा को 465 वोट पड़े। सचिव पद पर ध्यान सिंह (समीर) ने 4,045 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। आर्यन सहारन को 3,678 और मुस्कान चौहान को 1,286 वोट मिले, जबकि नोटा के खाते में 581 वोट गए। वहीं, संयुक्त सचिव पद पर विशाल (बामल) 3,506 वोटों के साथ विजेता बने। देवराज सिंह नैन को 2,338, राम चंदर सिंह को 1,656 और अमीन कौर को 1,141 वोट मिले, जबकि नोटा को 938 वोट पड़े।

अंकित बिधान पहली बार पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए हैं। पिछली बार भी एबीवीपी का उम्मीदवार अध्यक्ष बना था। हालांकि, उस समय संगठन को एसओआई का समर्थन हासिल नहीं था। इस बार एसओआई के चुनाव मैदान से बाहर होने के बाद उसने एबीवीपी के समर्थन का फैसला किया, जिसका असर चुनावी समीकरणों पर देखने को मिला।

अध्यक्ष पद के मुकाबले में एबीवीपी के अंकित बिधान के अलावा आम आदमी पार्टी समर्थित छात्र संगठन एएसएपी के आदिल बीर सिंह, कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू और साथ से जुड़े दर्शप्रीत सिंह मैदान में थे। चुनाव में कुल 16 उम्मीदवारों ने विभिन्न पदों के लिए किस्मत आजमाई। अध्यक्ष के अलावा उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और विभागीय प्रतिनिधियों के पदों के लिए भी मतदान हुआ।

जीत के बाद समर्थकों ने मनाया जश्न

परिणाम सामने आने के बाद एबीवीपी समर्थकों ने परिसर में जश्न मनाया। अंकित बिधान ने अपनी जीत को युवाओं और खासकर जेन-जी की जीत बताया। जीत के दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न झाड़ू को तोड़कर भी जश्न मनाया।

अंकित बिधान के अध्यक्ष चुने जाने के साथ ही एबीवीपी ने छात्र संघ की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की है। चुनाव परिणाम में आप समर्थित छात्र संगठन दूसरे और एनएसयूआई तीसरे स्थान पर रहा।

मतदान के दौरान लॉ विभाग में हंगामा

छात्र संघ चुनाव के दौरान पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ विभाग के बाहर भी तनाव की स्थिति बनी। मतदान के दौरान कुछ छात्रों ने विभाग के गेट के बाहर हंगामा किया। छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

छात्रों का आरोप था कि मतदान के लिए निर्धारित समय के बावजूद लॉ विभाग का गेट करीब 10 बजे बंद कर दिया गया, जिसके कारण कुछ छात्र वोट नहीं डाल सके। हंगामे के दौरान पुलिस मतपेटी को वहां से ले जाने लगी, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसका विरोध किया और मतपेटी ले जाने से रोक दिया।

इसके बाद कुछ छात्र धरने पर बैठ गए। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समझाने का प्रयास किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई और कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों को मौके से हटाए जाने की भी जानकारी सामने आई।

तीनों प्रवेश द्वारों पर कड़ी सुरक्षा

चुनाव को देखते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विश्वविद्यालय के तीनों प्रवेश द्वारों पर आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की जांच की गई। बाहरी लोगों की आवाजाही पर विशेष नजर रखी गई और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।

चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतपेटियों को निर्धारित स्थान पर पहुंचाया गया और मतगणना की प्रक्रिया शुरू हुई। विभागीय प्रतिनिधियों के परिणाम संबंधित विभागों में प्रदर्शित किए गए, जबकि प्रमुख पदों के परिणाम जिम्नेजियम हॉल में घोषित किए गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH