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एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा- अमृतसर में 2024 में हीटस्ट्रोक से हुईं थीं 78 मौतें

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- बढ़ती गर्मी, प्रदूषण और घटती हरियाली को माना गया बड़ा कारण

चंडीगढ़, 22 मई (हि.स.)। अमृतसर में वर्ष 2024 के दौरान हीटस्ट्रोक से देश में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं। इस साल जारी एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार अमृतसर में 78 लोगों की मौत गर्मी और लू के कारण हुई थी। इन आंकड़ों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस साल चिंता इसलिए बढ़ा दी है, क्योंकि इस शहर में सालभर बड़ी संख्या में बाहरी लोग आते-जाते रहते हैं।

जिला रेडक्रॉस के सचिव सैमसन मसीह ने बताया कि अमृतसर पूरी दुनिया में श्री हरमंदिर साहिब के गुरु रामदास जी लंगर हॉल में 24 घंटे मुफ्त भोजन सेवा के लिए जाना जाता है। इसके अलावा धार्मिक अवसरों पर शहरभर में अलग-अलग समुदायों की ओर से लंगर और मीठे पानी की छबीलें भी लगाई जाती हैं। इसके बावजूद हीटस्ट्रोक से इतनी बड़ी संख्या में मौतें होना गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में बेसहारा अमृतसर पहुंचते हैं, जिनके पास न तो पर्याप्त संसाधन होते हैं और न ही गर्मी से बचाव के साधन। ये लोग धार्मिक स्थलों, मजारों, सड़कों और डिवाइडरों के किनारे रहते हैं, जिससे वे भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा शिकार बनते हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि मानव शरीर लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखने की कोशिश करता है और पसीना शरीर को ठंडा रखने का प्राकृतिक तरीका है। नमी अधिक होने और हवा कम चलने पर पसीना सही ढंग से सूख नहीं पाता, जिससे शरीर की ठंडक प्रणाली प्रभावित हो जाती है।

उन्होंने कहा कि पंजाब के मैदानी इलाकों, विशेषकर अमृतसर में गर्मियों के दौरान हवा का ठहराव और नमी अधिक होने से गर्मी का असर और बढ़ जाता है। पंजाब का भूगोल भी इसकी एक वजह है, क्योंकि यहां कोई बड़ा जल स्रोत नहीं है, जो तापमान को नियंत्रित कर सके।

पर्यावरणविदों के अनुसार अप्रैल से जून, 2024 तक चली लंबी और तीव्र हीटवेव इसका प्रमुख कारण रही। विशेषज्ञों ने बढ़ते प्रदूषण और घटती हरियाली को भी चिंता का कारण बताया। सड़क चौड़ीकरण, फोरलेन प्रोजेक्ट, दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे, एलिवेटेड रोड, बीआरटीएस और व्यावसायिक विकास के कारण बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है, जिससे तापमान और प्रदूषण दोनों बढ़े हैं।

उधर, डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को इन मौतों के कारणों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रशासन हर साल पौधारोपण अभियान चलाता है, लेकिन अब पहले लगाए गए पौधों के जीवित रहने की दर की भी समीक्षा की जाएगी।

डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि प्रशासन की ओर से लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है कि वे अधिक पानी पिएं, दोपहर के समय धूप में बाहर निकलने से बचें और हीटवेव से बचाव के उपाय अपनाएं। साथ ही रेडक्रॉस और सामाजिक संस्थाओं को सार्वजनिक स्थानों पर ठंडे पानी की व्यवस्था, छतरियां लगाने और जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH