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डीए मामले में पंजाब सरकार को हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अपील आगे बढ़ाने को कहा

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लंबित महंगाई भत्ता और राहत के भुगतान पर हाई कोर्ट ने कहा-अपील लंबित रखकर आदेशों का पालन नहीं टाला जा सकता

चंडीगढ़, 10 सितंबर (हि.स.)। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के भुगतान से जुड़े मामले में पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी विशेष अनुमति याचिका को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपनी अपील को तकनीकी खामियों में लंबित रखकर हाई कोर्ट के आदेशों के पालन को अनिश्चितकाल तक टाल नहीं सकती।

डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से कहा कि यदि उसे हाई कोर्ट के फैसले से आपत्ति है तो उसे अपने अपील के अधिकार का उपयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। अदालत ने सरकार को आगाह किया कि वह मामले को लंबित रखने या आदेशों के पालन में देरी करने की कोशिश न करे।

मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से कहा कि वह अगले सप्ताह तक सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील की सुनवाई कराने का प्रयास करे। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि विशेष अनुमति याचिका में मौजूद तकनीकी खामियां दूर करने की प्रक्रिया चल रही है और अपील के लिए 90 दिनों की समयसीमा का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि अपील करने के अधिकार पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन उसका सक्रिय रूप से अनुसरण किया जाना जरूरी है।

मामला हाई कोर्ट के 3 अगस्त के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को केंद्रीय दरों के अनुसार लंबित डीए और डीआर की अद्यतन किस्तें जारी करने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से अनुपालन का विवरण शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करने को भी कहा है।

इस विवाद की शुरुआत 8 अप्रैल के एक फैसले से हुई थी, जिसमें राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की तरह केंद्रीय पैटर्न पर डीए और डीआर देने के निर्देश दिए गए थे। बाद में 3 अगस्त को डिवीजन बेंच ने राज्य और पीएसपीसीएल की अपीलें खारिज करते हुए लंबित राशि एक पखवाड़े के भीतर जारी करने को कहा था।

अब हाई कोर्ट ने मामले को एक सप्ताह के लिए स्थगित करते हुए साफ कर दिया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट में अपील आगे नहीं बढ़ती, तो वह लंबित अनुपालन और आपत्तियों पर आगे विचार करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH