हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति के विरोध में पंजाब सरकार ने पारित किया प्रस्ताव
अश्वनी मिश्रा के शपथ ग्रहण समारोह को रोकने की मांग
चंडीगढ़, 06 सितंबर (हि.स.)। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार ने कड़ा एतराज जताया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में रविवार को हुई आपात कैबिनेट बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया। कैबिनेट ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पंजाब के राज्यपाल से अपील की है कि राज्य सरकार का पक्ष सामने आने तक जस्टिस मिश्रा को पद की शपथ न दिलाई जाए।
पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य से जुड़े संवैधानिक और प्रशासनिक महत्व के मामलों में उसकी राय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कैबिनेट प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया में पंजाब सरकार को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बैठक के बाद कहा कि पंजाब के संवैधानिक अधिकारों के कथित उल्लंघन के खिलाफ कैबिनेट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में निर्धारित प्रक्रिया और मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर का पालन नहीं किया गया।
मान ने केंद्र सरकार पर पंजाब के हितों की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए आरडीएफ के करीब 9 हजार करोड़ रुपये, बाढ़ राहत और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़े नियमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों से जुड़े मामलों में केंद्र के एकतरफा फैसलों का विरोध करेगी।
जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति की अधिसूचना जारी होने के बाद रविवार को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई गई थी। बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। कई मंत्री चंडीगढ़ से बाहर होने के कारण अपने-अपने जिलों के उपायुक्त कार्यालयों से बैठक में शामिल हुए।
हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

