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गुरुद्वारों के भीतर योग करना सिख मर्यादा के विरुद्ध: जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज

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गुरुद्वारों के भीतर योग करना सिख मर्यादा के विरुद्ध: जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज


कहा—गुरु घर गुरबाणी, नाम सिमरन और आध्यात्मिक शांति के लिए, व्यायाम के लिए नहीं

चंडीगढ़, 27 जुलाई (हि.स.)। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा है कि गुरुद्वारों के भीतर योग नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसी गतिविधियां सिख धार्मिक परंपराओं और गुरु घरों की पवित्रता के अनुरूप नहीं हैं।

सिख संगत के नाम जारी संदेश में जत्थेदार ने कहा कि गुरुद्वारे गुरबाणी, नाम सिमरन और सिख गुरुओं की शिक्षाओं को समर्पित पवित्र स्थान हैं। गुरुद्वारा परिसर में योगासन या इसी प्रकार के अन्य शारीरिक व्यायाम करना सिख मर्यादा का उल्लंघन है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग योग करना चाहते हैं, वे अपने घरों या निर्धारित स्थानों पर इसका अभ्यास कर सकते हैं, लेकिन गुरुद्वारों की धार्मिक गरिमा और पवित्रता हर स्थिति में कायम रहनी चाहिए।

जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि गुरुद्वारे शारीरिक व्यायाम या योग सत्र आयोजित करने के लिए नहीं हैं। इनका मुख्य उद्देश्य संगत को गुरबाणी कीर्तन सुनने, नाम सिमरन करने और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने का अवसर प्रदान करना है।

उन्होंने सिख संगत से अपील की कि वह सिख रहित मर्यादा का सम्मान करे और ऐसी गतिविधियों से बचे, जो सिख परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि गुरु घरों की पवित्रता की रक्षा करना सिख समुदाय की सर्वोच्च प्राथमिकता है और धार्मिक मर्यादा का किसी भी प्रकार का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जा सकता।

जत्थेदार ने दोहराया कि गुरुद्वारों का उद्देश्य लोगों को गुरबाणी से जोड़ना और उन्हें आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करना है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से गुरु घरों की गरिमा का सम्मान करने और उनकी पवित्रता बनाए रखने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH