सोशल मीडिया पर वायरल फर्जी नियुक्ति पत्र को लेकर सांसद ने की शिकायत, मोहाली में एफआईआर
मोहाली, 29 जून (हि.स.)। गुरदासपुर से
सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त
किए जाने संबंधी एक फर्जी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में सांसद की शिकायत पर स्टेट साइबर क्राइम थाना
मोहाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
जानकारी
के अनुसार सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस संबंध में पंजाब के डीजीपी को शिकायत
भेजी थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों
में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के नाम से एक फर्जी और मनगढ़ंत पत्र प्रसारित किया
जा रहा है। इस पत्र में दावा किया गया है कि उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी
का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
रंधावा
ने स्पष्ट किया कि यह पत्र पूरी तरह फर्जी, अनधिकृत और दुर्भावनापूर्ण तरीके से
तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं
को गुमराह करना तथा राजनीतिक भ्रम की स्थिति पैदा करना है। सांसद ने शिकायत में यह
भी कहा कि इससे पहले भी उनके निधन की झूठी खबर सोशल मीडिया पर फैलाई गई थी,
जिसकी शिकायत पंजाब पुलिस को दी गई थी,
लेकिन आरोपियों के खिलाफ प्रभावी
कार्रवाई नहीं हुई।
सांसद
ने आशंका जताई कि दोनों घटनाओं के पीछे एक ही गिरोह की भूमिका हो सकती है।
उन्होंने मांग की कि दोनों मामलों की जांच को आपस में जोड़कर किया जाए और पहले
मामले में हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी उपलब्ध करवाई जाए। रंधावा
ने कहा कि किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे सोशल
मीडिया पर वायरल करना केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास नहीं
है, बल्कि इससे
लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनता के विश्वास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने
पुलिस से मांग की थी कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर तकनीकी जांच के माध्यम से
फर्जी पत्र तैयार करने वाले, उसे
प्रसारित करने वाले और वायरल करने में शामिल सभी लोगों की पहचान की जाए तथा उनके
खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। शिकायत
की जांच के बाद स्टेट साइबर क्राइम थाना मोहाली ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ
भारतीय न्याय संहिता 2023 की
धारा 336(2), 340(2) और
356(1) के तहत मामला दर्ज कर
लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान तथ्यों और साक्ष्यों के आधार
पर आवश्यकता पड़ने पर अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
फिलहाल साइबर और
तकनीकी जांच के जरिए फर्जी पत्र के मूल स्रोत का पता लगाने के साथ-साथ इसे सोशल
मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित करने वालों की पहचान की जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

