पंजाब में 'सत्य, जवाबदेही और मेल-मिलाप आयोग' बनाने की मांग, पूर्व आईएएस ने राज्यपाल को लिखा पत्र
चंडीगढ़, 08 जुलाई (हि.स.)। पंजाब के पूर्व आईएएस अधिकारी और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. जगमोहन सिंह राजू ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर राज्य में आतंकवाद के दौर (1980-1995) की घटनाओं की निष्पक्ष जांच के लिए 'सत्य, जवाबदेही और मेल-मिलाप आयोग' गठित करने की मांग की है।
डॉ. राजू ने लिखे अपने पत्र में कहा कि पंजाबी फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के विवाद ने एक बार फिर इस बहस को जन्म दिया है कि पंजाब के सबसे संवेदनशील दौर की सच्चाई क्या निष्पक्ष तरीके से सामने लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि 1980 से 2000 के बीच पंजाब में हुई हिंसा और आतंकवाद को लेकर समाज में आज भी अलग-अलग और परस्पर विरोधी धारणाएं मौजूद हैं। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय आयोग का गठन किया जाना चाहिए।
डॉ. राजू ने अपने पत्र में लिखा कि पंजाब तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक 1980 से 1995 के उग्रवाद काल के दौरान हुई घटनाओं की सच्चाई को स्वीकार नहीं किया जाता और विभिन्न दावों की तथ्यात्मक जांच नहीं होती। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आयोग का उद्देश्य किसी से प्रतिशोध लेना नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही तय करना और तथ्यों के आधार पर सत्य स्थापित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवादित स्मृतियों के आधार पर पंजाब का शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण भविष्य नहीं बनाया जा सकता। अब समय आ गया है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र प्रक्रिया के माध्यम से सच्चाई स्थापित की जाए, राजनीतिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और समाज में मेल-मिलाप का रास्ता तैयार किया जाए।
डॉ. राजू ने अपने पत्र में मानवाधिकारों की सुरक्षा, संवैधानिक शासन व्यवस्था और कानून के राज को मजबूत करने के उद्देश्य से संस्थागत, कानूनी और प्रशासनिक सुधारों की भी वकालत की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

