पंजाब सरकार पर कर्मचारियों और पेंशनरों की कुल 32,418 करोड़ रूपये का देनदारी
- पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में मुख्य सचिव ने हलफनामा देकर दी जानकारी
चंडीगढ़, 02 नवंबर (हि.स.)। पंजाब सरकार तथा कर्मचारियों के बीच डीए की अदायगी को लेकर चल रही खींचतान के बीच सोमवार को पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामें में स्वीकार किया है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के बकाया की देनदारी 22,818 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। कर्मचारियों और पेंशनरों की कुल लंबित देनदारी करीब 32,418 करोड़ रुपये बताई गई है।
मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि हाईकोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के तहत बकाया राशि पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए सरकार पर इसका पालन करने की जिम्मेदारी बनी हुई है।
सरकार ने अदालत को बताया कि केंद्र के समान दर से डीए देने पर सरकारी खजाने पर सालाना करीब 4,712 करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वित्त वर्ष 2025-26 में वेतन और पेंशन पर सरकार का खर्च करीब 58,064 करोड़ रुपये रहा। ऐसे में बकाया भुगतान के लिए सरकार को विशेष बजटीय प्रावधान करना पड़ सकता है।
हलफनामे के अनुसार 18 सितंबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में डीए में 8 प्रतिशत वृद्धि का फैसला लिया गया। इसके बाद 23 सितंबर को वित्त विभाग ने आदेश जारी कर दर 42 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी। यह वृद्धि 1 सितंबर से लागू की गई। बढ़ी हुई दर का लाभ सितंबर के वेतन और पेंशन में अक्टूबर के दौरान दिया गया।
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के 3 अगस्त के फैसले को चुनौती देते हुए 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की थी। रजिस्ट्री ने इसमें प्रक्रियागत खामियां बताईं, जिसके बाद सरकार ने 1 अक्टूबर को याचिका दोबारा दाखिल की। मुख्य सचिव ने भरोसा दिलाया कि सरकार न्यायालय के आदेशों का सम्मान करती है और कर्मचारियों व पेंशनरों को 6 प्रतिशत सालाना ब्याज सहित बकाया देने की देनदारी स्वीकार करती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

