सत्ता बचाने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र और संविधान का गला घोंटा : धर्मेंद्र प्रधान
-संविधान हत्या दिवस पर चंडीगढ़ में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान
चंडीगढ़, 25 जून (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन था, जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता बचाने के लिए संविधान की मूल भावना, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं का वाहक राष्ट्र है। भारत की लोकतांत्रिक चेतना उसकी सांस्कृतिक विरासत में समाहित है और यही कारण है कि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है।
प्रधान गुरुवार को संविधान हत्या दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा चंडीगढ़ प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह, राज्यसभा सांसद रेखा वर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहीं। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे भारत की परिकल्पना की थी, जहां जनता सर्वोच्च होगी और शासन संविधान के अनुरूप संचालित होगा। लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल के माध्यम से इन मूल्यों को कुचलने का प्रयास किया। उस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया गया, प्रेस की आवाज को दबाया गया, विपक्षी नेताओं को जेलों में डाला गया और हजारों लोकतंत्र सेनानियों को यातनाएं सहनी पड़ीं।
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करने के बजाय पूरे देश को आपातकाल की बेड़ियों में जकड़ दिया गया। नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए और भय का वातावरण बना दिया गया। कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए सरकारी तंत्र का खुलकर दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों का नाम नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, विचार रखने के अधिकार और संविधान के सम्मान की व्यवस्था है।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए लोकतंत्र सेनानियों एवं भाजपा के वरिष्ठ नेताओं देशराज टंडन, जतिंदर चोपड़ा, ओम प्रकाश आहूजा, सुरिंदर महाजन तथा धर्मवीर को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके संघर्ष, साहस और बलिदान का अभिनंदन किया।
आपातकाल के दौरान इन सेनानियों ने व्यक्तिगत कष्ट, उत्पीड़न और कारावास सहकर भी लोकतंत्र की ज्योति को बुझने नहीं दिया। उनका जीवन, समर्पण और राष्ट्रहित में दिया गया बलिदान आने वाली पीढ़ियों को संविधान, लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भाजपा चंडीगढ़ प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के माथे पर लगा ऐसा कलंक है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हजारों कार्यकर्ताओं और देशभक्त नागरिकों ने जेलों में रहकर संघर्ष किया और अनेक यातनाएँ झेलीं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद सत्य पाल जैन ने अपने संबोधन में आपातकाल के दौरान स्वयं देखे और अनुभव किए गए घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक विरोध को कुचलने के लिए पूरे सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानियों, पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया। उपस्थित जनसमूह ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी, प्रदेश महामंत्री रामबीर भट्टी, मोर्चों एवं प्रकोष्ठों के संयोजक शक्तिदेवशाली, प्रदेश उपाध्यक्ष इंद्रा सिंह, भारत कुमार तथा प्रदेश मीडिया प्रभारी रवि रावत उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

