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फिल्म ‘सतलुज’ पर बोले कैप्टन अमरिंदर- इतिहास से भाग नहीं सकते, लेकिन वर्तमान को बांटना भी ठीक नहीं

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फिल्म ‘सतलुज’ पर बोले कैप्टन अमरिंदर- इतिहास से भाग नहीं सकते, लेकिन वर्तमान को बांटना भी ठीक नहीं


चंडीगढ़, 14 जुलाई (हि.स.)। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर चल रही सियासत पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास से भागा नहीं जा सकता, लेकिन इतिहास का इस्तेमाल वर्तमान में लोगों को बांटने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि ‘सतलुज’ के मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाला जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के इस मामले को बार-बार उठाने पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि इस फिल्म को लेकर किसी भी राजनीतिक दल को लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि कुछ दल इस विवाद के जरिए राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश कर सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर पंजाब के अशांत दौर की बात की जाती है, तो पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उस दौर में हजारों निर्दोष लोग मारे गए, वहीं आतंकवाद से लड़ते हुए कई पुलिसकर्मियों ने भी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने किसी भी पक्ष से ज्यादतियां कीं, उनके नाम सामने आने चाहिए।

फिल्म के सार्वजनिक प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि फिल्म को मंच से हटाने के पीछे कौन था, लेकिन फिल्म हटाए जाने के बाद ही लोगों में इसे लेकर ज्यादा जिज्ञासा पैदा हुई। यदि फिल्म मंच पर बनी रहती, तो शायद इतनी चर्चा न होती। उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा लापता लोगों से जुड़े सबूत जुटा रहे थे और वे कोई गलत काम नहीं कर रहे थे। बाद में छह पुलिसकर्मियों को दोषी भी ठहराया गया, इसे नकारा नहीं जा सकता। कैप्टन ने कहा कि हमें अपने अतीत को स्वीकार करना चाहिए, ताकि भविष्य में वही गलतियां दोबारा न हों, लेकिन युवा पीढ़ी को पुराने जख्मों के आधार पर भड़काना सही नहीं है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के सबसे कठिन दौर में भी हिंदू और सिख समाज आम तौर पर एकजुट रहा। उन्होंने कहा कि उस समय लोग खुद को पहले पंजाबी मानते थे, न कि हिंदू या सिख। उन्होंने दरबार साहिब के प्रति हिंदू समाज की श्रद्धा का जिक्र करते हुए कहा कि ऑपरेशन ब्लूस्टार से पहले जब वे बातचीत की कोशिशों के दौरान रात में गुरु नानक निवास जाते थे, तो परिक्रमा की सफाई करने वालों में बड़ी संख्या हिंदुओं की होती थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि गिल को पंजाब में एक विशेष जिम्मेदारी दी गई थी और आतंकवाद को खत्म करने में उनकी भूमिका को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। यदि उनके अधीन किसी अधिकारी ने गलत काम किया, तो उसकी जिम्मेदारी व्यक्तिगत स्तर पर तय होनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH