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1984 सिख नरसंहार पीड़ित महिलाओं ने सुनाई आपबीती, कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

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1984 सिख नरसंहार पीड़ित महिलाओं ने सुनाई आपबीती, कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप


नई दिल्ली, 03 नवंबर (हि.स.)। 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ित परिवारों की महिलाओं ने मंगलवार को तिलक विहार स्थित गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में आयोजित तीन दिवसीय समागम में अपनी दर्दनाक आपबीती सुनाई।

इस दौरान माता भागी कौर, कुलजीत कौर, गंगा कौर, अतर कौर, लक्ष्मी कौर, ठाकरी कौर, प्रीति सिंह, जसवीर कौर, परमजीत कौर, मनप्रीत कौर आदि महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाई।

इस मौके पर जोन अध्यक्ष हरीश ओबेरॉय और पश्चिमी दिल्ली जिले के महामंत्री सरदार चरण जीत सिंह लवली ने भी गुरुद्वारे में श्रद्धांजलि अर्पित की और सिख नरसंहार में शहीद हुए शहीदों को याद किया। रविवार को शहीद गंज गुरुद्वारे में ही दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

शहीद हुए परिवारों की महिलाओं ने बताया कि किस प्रकार तत्कालीन कांग्रेस सरकार के संरक्षण में उपद्रवियों ने उनके परिवारों पर बर्बर अत्याचार किए, उनके घर उजाड़े, परिवार के सदस्यों की निर्मम हत्या की और महिलाओं को जीवनभर न भूलने वाला दर्द दिया।

पीड़ित परिवारों की महिलाओं ने कहा कि 1984 का सिख नरसंहार भारत के इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय है, जिसे कांग्रेस कभी अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए भुला नहीं सकती। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य दंगा नहीं था, बल्कि निर्दोष सिख भाइयों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने बताया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार न केवल हिंसा रोकने में विफल रही, बल्कि कांग्रेस के नेताओं पर हिंसा भड़काने और आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण देने के गंभीर आरोप भी लगे।

उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस के नेता लोकतंत्र, संविधान और मानवाधिकारों की दुहाई देते हैं, लेकिन उन्हें पहले 1984 में सिख समाज के साथ हुए अन्याय का जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को बताना चाहिए कि उन हजारों परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस ने क्या किया? आखिर इतने वर्षों तक पीड़ित परिवार न्याय और इंसाफ के लिए क्यों भटकते रहे?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सिख समाज से केवल औपचारिक संवेदना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों से मांफी मांगनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी