दिल्ली विंटर एक्शन प्लान तैयार, ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ एक अक्टूबर से
-मुख्यमंत्री ने 10 सूत्रीय कार्ययोजना और कड़े प्रतिबंधों की रूपरेखा की पेश
नई दिल्ली, 28 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सोमवार को पर्यावरण भवन में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा शामिल हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने एक व्यापक, रोकथाम-केंद्रित और समय-सीमा वाला ‘विंटर एक्शन प्लान 2026-27’ तैयार और इससे एक नंवबर से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई पूरी रणनीति ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण पर आधारित है। इसके तहत केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, सीएक्यूएम, सीपीसीबी, स्थानीय निकायों, दिल्ली पुलिस, डीएमआरसी और अन्य संबंधित एजेंसियों को एक साथ लाया गया है। साथ ही, स्वच्छ हवा के लिए दिल्ली की इस लड़ाई के केंद्र में 'जन-भागीदारी' को प्रमुख आधार बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, इसके लिए हमारी सरकार बीते एक साल से एक विशेष और सुनियोजित रोडमैप पर काम कर रही है। जमीनी स्तर पर फैसलों को कड़ाई से लागू करने के साथ-साथ सभी एजेंसियों के समन्वय और अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से स्थिति में बड़ा सुधार लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जनभागीदारी (हम सभी की जिम्मेदारी, साफ हवा में भागीदारी) के संकल्प के साथ 10-सूत्रीय कार्ययोजना और कड़े प्रतिबंधों की रूपरेखा पेश की और कहा कि हमारा यह प्लान दिल्ली में प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लाएगा।
एक अक्टूबर से दिल्ली के सभी 500 ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर (एएनपीआर) युक्त पेट्रोल पंपों पर विशेष जागरूकता और प्रवर्तन अभियान शुरू किया जाएगा। बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र और मियाद पूरी कर चुके वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। शीतकालीन कार्ययोजना के तहत 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर पंजीकृत और बीएस-VI मानक से नीचे के सभी डीजल/पेट्रोल वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा (केवल सीएनजी और ईवी वाहनों को छूट)। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल उड़ाने वाली सभी तोड़फोड़ गतिविधियों और बाहरी सिविल निर्माण कार्यों पर पूर्ण रोक रहेगी। 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक दिल्ली में सभी प्रकार के निर्माण और तोड़-फोड़ कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा। सभी निर्माण स्थलों पर 100 प्रतिशत सीसीटीवी कवरेज अनिवार्य होगी और नक्शा पास कराने के लिए ‘मलबे ऐप’ पर पंजीकरण जरूरी कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि एक नवंबर से विंटर प्रोटोकॉल के तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम या सप्ताह में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम लागू रहेगा। यातायात का दबाव कम करने के लिए नगर निगम कार्यालयों (सुबह 8:30 से शाम 5:00) और दिल्ली सरकार के दफ्तरों (सुबह 10:00 से शाम 6:30) के समय में बदलाव किया गया है। निजी वाहनों के इस्तेमाल को घटाने के लिए दिल्ली में अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दो गुना किया जाएगा (मेट्रो पार्किंग को छोड़कर)। वर्तमान में दिल्ली में 6,840 बसें (5,088 ई-बसों सहित) बेड़े में शामिल हैं। दिल्ली मेट्रो की दैनिक सवारी 72 लाख और डीटीसी की सवारी 42 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए एक से 10 अक्टूबर तक ‘दिल्ली मेट्रो सारथी ऐप’ डाउनलोड अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सड़कों से उड़ने वाली धूल रोकने के लिए 3,000 किमी सड़क रिडेवलपमेंट का लक्ष्य है, जिसमें से 1,193 किमी कार्य पूरा हो चुका है। कंक्रीट का काम 31 अक्टूबर 2026 तक और तारकोल का कार्य 15 नवंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने की समयसीमा तय की गई है। सड़क के पुनर्निर्माण के साथ-साथ, गहरी सफाई, मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव, पूरी सड़क पर पक्की सतह बनाना, फुटपाथ को बेहतर बनाना, कचरा जमा होने वाली जगहों को हटाना और खाली पड़ी जमीन पर हरियाली बढ़ाने जैसे कामों में तेजी लाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के सभी 37 एयर क्वॉलिटी और ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स पर जनप्रतिनिधि (सांसद/विधायक/पार्षद) और नोडल अधिकारी साप्ताहिक निरीक्षण करेंगे। अक्टूबर तक 15 प्रमुख सड़क स्ट्रेच को सिग्नल-फ्री और जाम-मुक्त बनाने का काम जारी है (8 पूरे हो चुके हैं)। प्रदूषण और ट्रैफ़िक जाम वाले हॉटस्पॉट पर खास तौर पर और जगह के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सड़कों की सफाई के लिए 98 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग (एमआरएसएम) मशीनें दो पालियों में तैनात हैं। 31 अक्टूबर तक सभी प्रमुख सड़कों की गहन सफाई पूरी की जाएगी। खुले में कचरा व बायोमास जलाने पर रोक के लिए जीरो बर्निंग शपथ अभियान और सुरक्षा गार्डों के लिए हीटिंग बूथ बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरतमंदों के लिए 5 रुपये में भोजन देने वाली 100 ‘अटल कैंटीन’ चालू हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने और ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए ‘परिवर्तन योजना’ और ईवी नीति 2026 के तहत वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए चलाए गए अभियान में 11,271 इकाइयों के सर्वेक्षण के बाद 2,283 प्रदूषणकारी इकाइयों को सील या बंद किया गया है। इसके अलावा 434 एकड़ खाली जमीनों में से 433 एकड़ क्षेत्र को हरा-भरा कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अक्टूबर से एआई-सक्षम कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर पूरी तरह क्रियाशील हो जाएंगे। 334 एनफोर्समेंट टीमें दो शिफ्टों में 24 घंटे काम करेंगी। नागरिक अपनी शिकायतें ‘ग्रीन दिल्ली ऐप’ पर दर्ज करा सकते हैं तथा नागरिकों के सुझावों के लिए 1 अक्टूबर से एक विशेष पोर्टल भी लॉन्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वाले उद्योगों को बंद किया जाएगा और गैर-अनुरूप क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई होगी। प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए कुल 334 प्रवर्तन दल तैनात किए जाएंगे, जिनमें एमसीडी, एनडीएमसी और दिल्ली छावनी बोर्ड के 256 वार्ड दल तथा डीपीसीसी के 78 दल शामिल होंगे। इनकी निगरानी चौबीसों घंटे दो पालियों में की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्मशान घाटों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए तकनीकी समाधान अपनाए जा रहे हैं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए इलेक्ट्रिक शवदाह गृहों की उपलब्धता और जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

