सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि लोगों के हित में नीतियां बनाना हैः विजेंद्र गुप्ता
नई दिल्ली, 09 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार को कहा कि एक सशक्त लोकतंत्र का सार केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे सार्थक और प्रभावी नीति-क्रियान्वयन तक पहुंचाना आवश्यक है। लोकतंत्र में विभिन्न मत और असहमति स्वाभाविक है, किंतु शासन की वास्तविक सफलता इस बात से मापी जाती है कि कानून और नीतियां आम नागरिक के जीवन पर कितना सकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
विजेंद्र गुप्ता ने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के मानव संसाधन विकास प्रकोष्ठ के कार्यक्रम “माइन्ड्यूक्टर 14.0” को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल राजनीति नहीं, बल्कि ऐसी नीतियां बनाना है जो लोगों की सेवा करें।
उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी विधायी संस्थाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि विधानसभाएं और संसद ऐसे मंच हैं जहां सार्वजनिक मुद्दों पर गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ विचार-विमर्श किया जाता है तथा समाज के हित में नीतिगत निर्णय लिए जाते हैं।
छात्रों, प्राध्यापकों और युवा नेतृत्वकर्ताओं की सभा में गुप्ता ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा किया तथा नेतृत्व, सुशासन, राष्ट्र-निर्माण और सार्वजनिक नीति के भविष्य को आकार देने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एक विकसित भारत की पहचान उन संस्थानों से होती है जो ईमानदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करते हैं तथा उन कानूनों से जो प्रत्येक नागरिक की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करते हैं।
श्रीराम कॉलेज की शैक्षणिक उत्कृष्टता को ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ते हुए गुप्ता ने कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान केवल आर्थिक प्रगति से नहीं होती। वास्तविक विकास संस्थागत मजबूती, अवसरों के विस्तार और ऐसी संवाद संस्कृति से उत्पन्न होता है जो लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करती है। जब विभिन्न विचारों को सम्मान और शालीनता के साथ सुना और उन पर विमर्श किया जाता है तो सार्वजनिक नीतियां अधिक संतुलित और स्थायी बनती हैं।
भारत के आर्थिक और प्रशासनिक भविष्य के निर्माता के रूप में छात्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की जिम्मेदारी आज के युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने एसआरसीसी के प्रतिभाशाली और विचारशील छात्रों, भविष्य के अर्थशास्त्रियों, प्रशासकों और उद्यमियों को अपनी पेशेवर भूमिकाओं को सामाजिक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व के दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित किया।
संबोधन के अंत में विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि युवाओं के विचार और प्रयास व्यापक राष्ट्रीय हित और समाज की सेवा के उद्देश्य से प्रेरित होंगे, तो एक ऐसे विकसित भारत का सपना साकार होगा जहां शासन उद्देश्यपूर्ण हो और कानून वास्तव में जनता की सेवा करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

