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भारती दीक्षित ने ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक गाथा को ओजपूर्ण शैली में किया प्रस्तुत

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भारती दीक्षित ने ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक गाथा को ओजपूर्ण शैली में किया प्रस्तुत


नई दिल्ली, 23 मई (हि.स.)। इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती एवं दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं जयंती पर शनिवार को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, चांदनी चौक में ‘वंदे मातरम गाथा’ विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध किस्सागो एवं चित्रकार भारती दीक्षित ने ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक गाथा को ओजपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया।

भारती दीक्षित ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ गीत की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने वर्ष 1875 में की था। 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में इसे स्थान दिया गया। उपन्यास में सन्यासी भवानंद इस गीत को भावपूर्ण स्वर में गाता है, जो आगे चलकर राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत बन गया।

उन्होंने वंदे मातरम् से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन करते हुए बताया कि 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में युवा कवि रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे स्वर दिया, जिससे यह जन-जन तक पहुंचा। 1906 के कांग्रेस अधिवेशन में पुनः इसके गायन के बाद इसे राष्ट्रीय पहचान मिली। बंग-भंग आंदोलन के दौरान यह गीत जनएकता का प्रतीक बन गया और धीरे-धीरे देश-विदेश तक पहुंचा। अंग्रेजी शासन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई।

लगभग 50 मिनट की प्रस्तुति के दौरान श्रोता पूरी तन्मयता से कार्यक्रम से जुड़े रहे। भारती दीक्षित ने स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम्’ की भूमिका से लेकर वर्तमान समय तक उसकी प्रासंगिकता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष विनोद बब्बर ने स्वागत वक्तव्य देते हुए ‘वंदे मातरम्’ की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने भी “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” कहकर मातृभूमि के महत्व को सर्वोपरि बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि ‘वंदे मातरम्’ गीत की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने की, किंतु इसकी भावना अथर्ववेद के मंत्र “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” में सदियों पूर्व से विद्यमान है।

कार्यक्रम का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के उपाध्यक्ष मनोज शर्मा ने किया। परिषद गीत सुनीता बुग्गा ने प्रस्तुत किया तथा आर.के. पुरम विभाग अध्यक्ष मलखान सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की राष्ट्रीय मंत्री नीलम राठी, केंद्रीय कार्यालय मंत्री संजीव सिन्हा, साहित्य परिक्रमा प्रबंधक रजनी मान, संयुक्त महामंत्री बृजेश गर्ग, कोषाध्यक्ष अक्षय अग्रवाल, दक्षिणी विभाग अध्यक्ष सारिका कालरा सहित अनेक साहित्यकार, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी