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दिल्ली में सड़क सुरक्षा के लिए ट्रैफिक पुलिस का '3ई' फॉर्मूला, नियम तोड़ने वालों की लगेगी क्लास, जिम्मेदार नागरिक होंगे सम्मानित

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दिल्ली में सड़क सुरक्षा के लिए ट्रैफिक पुलिस का '3ई' फॉर्मूला, नियम तोड़ने वालों की लगेगी क्लास, जिम्मेदार नागरिक होंगे सम्मानित


नई दिल्ली, 07 जुलाई (हि.स.)। राजधानी में बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने और लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पूरे जुलाई महीने के लिए विशेष 'जन जागृति अभियान' शुरू किया है। इस अभियान की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ चालान और कार्रवाई पर ही नहीं बल्कि लोगों को शिक्षित करने और नियमों का पालन करने वालों को सम्मानित करने पर भी जोर दिया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल कानून लागू करने से नहीं बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार बदलने से संभव है। इसी सोच के तहत अभियान को शिक्षा, प्रवर्तन और प्रोत्साहन यानी 3ई मॉडल पर आधारित किया गया है।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक मुख्यालय) विजयांता गोयल आर्या ने मंगलवार काे बताया कि अभियान के पहले चरण में राजधानी के प्रमुख ट्रैफिक सर्किलों पर 'ट्रैफिक पाठशाला' संचालित की जाएगी। यहां नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का सिर्फ चालान नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें कुछ समय रोककर सड़क सुरक्षा के नियमों, दुर्घटनाओं के कारणों और जिम्मेदार ड्राइविंग के महत्व के बारे में समझाया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों में ऐसा व्यवहारिक बदलाव लाना है, जिससे वे भविष्य में नियमों का उल्लंघन न करें।

इसके अलावा ट्रैफिक ट्रेनिंग पार्कों में बच्चों और युवाओं को सड़क पर सुरक्षित तरीके से चलने और वाहन चलाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों, कॉरपोरेट कार्यालयों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

अभियान के दूसरे चरण में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सख्ती दिखाई जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि खतरनाक ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना, रेड लाइट जंप करना, बिना हेलमेट दोपहिया चलाना, बिना सीट बेल्ट कार चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल और रॉन्ग साइड ड्राइविंग जैसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। पूरे महीने विशेष प्रवर्तन अभियान चलाकर ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि सड़क पर अनुशासन कायम हो और लापरवाह ड्राइविंग पर अंकुश लगाया जा सके।

अभियान का तीसरा और सबसे अलग पहलू 'प्रोत्साहन' है। ट्रैफिक पुलिस इस दौरान उन वाहन चालकों, साइकिल सवारों और अन्य नागरिकों की पहचान करेगी, जो लगातार ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं। ऐसे लोगों को 'रोड सेफ्टी चैंपियन' के रूप में सम्मानित किया जाएगा। पुलिस का मानना है कि केवल दंड से नहीं, बल्कि अच्छे व्यवहार को पहचान और सम्मान देकर भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

जन भागीदारी बढ़ाने के लिए ट्रैफिक पुलिस 'ट्रैफिक सेंटिनल ऐप' का भी व्यापक प्रचार कर रही है। इस ऐप के माध्यम से आम नागरिक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की सूचना पुलिस को दे सकते हैं। पुलिस के मुताबिक, पिछले दो दिनों में ही 3811 लोगों ने इस ऐप पर पंजीकरण कराया है, जो लोगों की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। पुलिस का मानना है कि नागरिकों के सहयोग से ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने में काफी मदद मिलेगी।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या किसी एक एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है। जब तक हर वाहन चालक, पैदल यात्री, साइकिल सवार और यात्री अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक दुर्घटनाओं में स्थायी कमी लाना संभव नहीं होगा। इसी उद्देश्य से शुरू किया गया यह महीनेभर का अभियान लोगों में स्वैच्छिक रूप से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की आदत विकसित करने, सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और दिल्ली की सड़कों को अधिक सुरक्षित एवं अनुशासित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी