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फर्जी नो-एंट्री पास पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस सख्त, दो मामलों में एफआईआर

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फर्जी नो-एंट्री पास पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस सख्त, दो मामलों में एफआईआर


नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स.)। राजधानी में फर्जी नो-एंट्री परमिट के इस्तेमाल पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। पिछले दो हफ्तों में पूर्वी और मध्य ट्रैफिक रेंज में ऐसे दो मामले सामने आए हैं, जिनमें व्यावसायिक वाहन फर्जी पास के साथ चलते पाए गए। दोनों मामलों में क्रमशः गोकुलपुरी और वजीराबाद थानों में एफआईआर दर्ज कर वाहनों को जब्त कर लिया गया है।

ट्रैफिक जोन-I की अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विजयांता गोयल आर्य ने बुधवार को बताया कि नो-एंट्री परमिट 32 श्रेणियों के वाहनों को जारी किया जाता है, जिनमें दूध, फल-सब्जी, खाद्यान्न, मांस, जमे हुए खाद्य पदार्थ, दवाइयां, ऑक्सीजन, एलपीजी, पानी और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े वाहन शामिल हैं। इन वाहनों को निर्धारित शर्तों के तहत ही शहर में प्रवेश की अनुमति दी जाती है।

उन्होंने बताया कि कुछ वाहन चालक अवैध एजेंटों और दलालों के जरिए फर्जी पास बनवाकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल गंभीर अपराध है, जिसमें वाहन जब्ती के साथ आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस तीन प्रकार के नो-एंट्री पास जारी करती है। वार्षिक पास एक वर्ष के लिए वैध होता है, जिसकी आवेदन फीस 200 रुपये और पास शुल्क 500 रुपये है, जो केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाता है। अस्थायी पास तीन माह तक के लिए बिना शुल्क के ऑनलाइन जारी होता है, जबकि शॉर्ट टर्म पास एक सप्ताह तक के लिए संबंधित ट्रैफिक पुलिस उपायुक्त कार्यालय से ऑफलाइन जारी किया जाता है।

पुलिस ने बताया कि पास जारी करने में वाहन की श्रेणी, ईंधन मानक, रूट और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाता है। 10 साल से पुराने डीजल वाहनों को अनुमति नहीं दी जाती और सीएनजी व बीएस मानक वाले वाहनों को प्राथमिकता दी जाती है। ट्रैफिक पुलिस ने आम लोगों और ट्रांसपोर्टरों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही पास बनवाएं और किसी भी दलाल या एजेंट से दूर रहें।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी